क्रिसिल रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर अपना नजरिया और मजबूत किया है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2025 के लिए यह अनुमान 6.5 प्रतिशत रखा गया था। क्रिसिल का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसके चलते विकास दर के अनुमान में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में घरेलू खपत भारत की विकास कहानी की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही है। महंगाई के दबाव में कमी आने से लोगों की क्रय शक्ति बेहतर हुई है, जिसका सीधा असर खपत पर पड़ रहा है। इसके साथ ही जीएसटी से जुड़े सुधारों और आयकर में दी गई राहत से उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को फायदा मिलने की संभावना है, जिससे मांग को और बल मिलेगा।
क्रिसिल ने यह भी संकेत दिया है कि नीतिगत स्थिरता और सुधारों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। बेहतर खपत माहौल के साथ-साथ सरकारी खर्च और निजी निवेश में धीरे-धीरे सुधार से आर्थिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। एजेंसी का मानना है कि इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव से वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की मजबूत दर से आगे बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, क्रिसिल की रिपोर्ट यह बताती है कि घरेलू मांग, कम होती मुद्रास्फीति और कर सुधारों का मेल भारत की विकास दर को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगा। यही वजह है कि एजेंसी ने अपने पहले के अनुमान की तुलना में अब भारत की आर्थिक संभावनाओं को और ज्यादा सकारात्मक रूप में देखा है।