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शीतकालीन सत्र में आज भी हंगामे के आसार, शिक्षक संकट से लेकर सड़क-राशन तक सरकार को घेरने की तैयारी

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन आज भी गर्म रहने के संकेत दे रहा है। प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल तक शिक्षा, सड़कों की बदहाली, राशन कार्ड और जल जीवन मिशन जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस तय मानी जा रही है। नवा रायपुर स्थित नए विधानसभा भवन में चल रहे इस पेपरलेस सत्र में आज सदन का माहौल लगातार तल्ख बने रहने की संभावना है।

शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल आज चर्चा के केंद्र में रहेंगे। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, बंद होते स्कूल और छात्रों के ड्रॉप-आउट जैसे मुद्दों को विपक्ष जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। कांग्रेस विधायक सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, संसाधनों की कमी और जमीनी हालात को लेकर सरकार को घेर सकते हैं। वहीं भाजपा सरकार नई शिक्षा नीति, स्कूल अधोसंरचना में सुधार और डिजिटल शिक्षा से जुड़ी उपलब्धियों को सामने रखकर जवाब देने की रणनीति बना रही है।

सड़कों की हालत भी आज सदन में बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में जर्जर सड़कों, अधूरे निर्माण कार्य और बढ़ते सड़क हादसों को लेकर विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएगा। इसके जवाब में लोक निर्माण विभाग द्वारा चल रही योजनाओं, स्वीकृत परियोजनाओं और आगामी कार्यों का विस्तृत ब्योरा सदन में पेश किया जाएगा।

राशन कार्ड से जुड़े मामलों पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया जा सकता है। नए राशन कार्ड जारी न होने, पात्र परिवारों के नाम जोड़ने-घटाने में गड़बड़ी और वितरण व्यवस्था में कथित अव्यवस्थाओं को लेकर विपक्ष खाद्य विभाग की पारदर्शिता पर सवाल उठाने की तैयारी में है। साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जमीनी स्थिति पर भी बहस होने के आसार हैं।

जल जीवन मिशन भी आज सदन में चर्चा का अहम विषय रहेगा। नल-जल योजना के तहत गांवों तक पानी पहुंचने के दावों, अधूरी परियोजनाओं और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों पर विपक्ष सवाल खड़े करेगा। वहीं सरकार ग्रामीण इलाकों में किए गए कार्यों और तय लक्ष्यों की उपलब्धि का आंकड़ों के साथ जवाब देने की कोशिश करेगी।

इससे पहले सत्र के दूसरे दिन बेरोजगारी भत्ता और रोजगार के मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेरोजगारी भत्ता नहीं दिए जाने को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि विधानसभा में दिए गए जवाबों के अनुसार योजना बंद नहीं है, फिर युवाओं को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। बजट में प्रावधान होने के बावजूद भत्ता नहीं देना युवाओं के साथ धोखा है, ऐसा आरोप लगाते हुए उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया था।

प्रश्नकाल के दौरान रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने बताया था कि 1 अप्रैल 2024 की स्थिति में प्रदेश में 11 लाख 39 हजार 656 बेरोजगार पंजीकृत थे, जो अब बढ़कर करीब 15 लाख तक पहुंच गए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार भत्ता देने के बजाय युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर फोकस कर रही है और जल्द ही 14 हजार से अधिक युवाओं को एक साथ रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए वॉकआउट भी किया था। इसके अलावा स्कूल-कॉलेजों में लगाए गए सैनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और इंसीनरेटर का मुद्दा भी उठा। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने करोड़ों खर्च के बावजूद कई मशीनों के खराब होने का आरोप लगाया, जिस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जांच का भरोसा दिया।

मोबाइल नेटवर्क की समस्या और धान खरीदी में अव्यवस्था को लेकर भी दूसरे दिन सदन में माहौल गरमाया था। भूपेश बघेल ने धान खरीदी व्यवस्था को लेकर सरकार पर निजीकरण का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया था और किसानों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया था।

कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के आमने-सामने आने से सदन में हंगामे, नोक-झोंक और तीखी बहस के पूरे आसार बने हुए हैं।

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