विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जो कुछ साल पहले तक सिर्फ साइंस फिक्शन फिल्मों में ही मुमकिन लगता था। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा माइक्रोबोट तैयार किया है, जिसका आकार नमक के दाने से भी छोटा है, लेकिन इसकी क्षमताएं बेहद चौंकाने वाली हैं। यह नन्हा रोबोट न सिर्फ अपने आसपास के माहौल को महसूस कर सकता है, बल्कि खुद फैसला लेने और इंसानी शरीर के भीतर तैरते हुए इलाज करने में भी सक्षम है।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के शोधकर्ताओं ने हासिल की है। उनकी यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल ‘साइंस रोबोटिक्स’ में प्रकाशित हुई है, जिसे मेडिकल साइंस और रोबोटिक्स के भविष्य के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दुनिया का पहला ऐसा माइक्रो-रोबोट है, जिसमें सेंस करने, सोचने और स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता एक साथ मौजूद है।
इस माइक्रोबोट की सबसे खास बात यह है कि इसके बेहद छोटे से शरीर में एक कंप्यूटर, मोटर और कई सेंसर फिट किए गए हैं। यह रोबोट सौर ऊर्जा से संचालित होता है और पानी या शरीर के तरल पदार्थों में तैरने के लिए दो सूक्ष्म इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल करता है। यानी यह बिना किसी बाहरी कंट्रोल के अपने आप मूव कर सकता है और तय किए गए काम को अंजाम दे सकता है।
शोधकर्ता मार्क मिस्किन के मुताबिक, भविष्य में इस तरह के माइक्रोबोट्स का इस्तेमाल इंसान के शरीर के उन हिस्सों तक दवा पहुंचाने में किया जा सकेगा, जहां आज के आधुनिक सर्जिकल उपकरण भी नहीं पहुंच पाते। इतना ही नहीं, ये रोबोट टूटे हुए टिशू को जोड़ने, सूजन कम करने और बेहद सटीक तरीके से इलाज करने में भी मदद कर सकते हैं। इस माइक्रोबोट को सिलिकॉन और टाइटेनियम से तैयार किया गया है और इसके ऊपर कांच जैसी एक खास परत चढ़ाई गई है, ताकि यह शरीर के अंदर मौजूद तरल पदार्थों से खराब न हो।
हालांकि वैज्ञानिक यह भी साफ कर रहे हैं कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इंसानों पर सीधे इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। फिलहाल इसे लैब स्तर पर टेस्ट किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिक डेविड ब्लाउ का कहना है कि अगला लक्ष्य इन माइक्रोबोट्स को आपस में संवाद करना सिखाना है, ताकि वे एक टीम की तरह मिलकर काम कर सकें। भविष्य में ऐसे रोबोट्स का झुंड मिलकर कैंसर, नसों की बीमारियों और जटिल आंतरिक चोटों जैसे बड़े रोगों से लड़ने में सक्षम हो सकता है।
कुल मिलाकर, यह माइक्रोबोट तकनीक मेडिकल साइंस के लिए एक नई क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है। जिस दिन ये नन्हे रोबोट इंसानी शरीर में सुरक्षित रूप से इलाज करने लगेंगे, उस दिन सर्जरी, दवाइयों और इलाज की पूरी परिभाषा ही बदल सकती है।