दिल्ली इन दिनों ऐसी सफेद चादर में घिरी है जिसे धुंध कहें या कोहरा, फर्क कर पाना मुश्किल हो गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बाहर निकलते ही सांस लेना भी भारी पड़ने लगा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक पर नजर डालें तो तस्वीर और भी डरावनी दिखती है। राजधानी के कई इलाकों में AQI 450 से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 500 का आंकड़ा भी पार कर गया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-4 लागू कर दिया गया है। इसके तहत नर्सरी से लेकर कक्षा पांचवीं तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं के आदेश जारी किए गए हैं।
मंगलवार को भी हालात ऐसे नहीं हैं कि लोग खुली हवा में चैन से सांस ले सकें। डॉक्टर पहले ही इसे हेल्थ इमरजेंसी जैसी स्थिति बता चुके हैं। अगर दिल्ली की तुलना देश के दूसरे बड़े शहरों से की जाए तो लखनऊ, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों की हवा फिलहाल राजधानी से बेहतर स्थिति में है। प्रदूषण ने दिल्ली को इस कदर जकड़ लिया है कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विदेश दौरे पर रवाना होने से पहले फुटबॉल स्टार लियोनल मेसी से मुलाकात तक नहीं कर पाए। बताया गया कि प्रदूषण के चलते मेसी का विमान देरी से पहुंचा और उससे पहले ही प्रधानमंत्री रवाना हो चुके थे।
सुबह के समय थोड़ी राहत जरूर देखने को मिली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार सुबह करीब आठ बजे दिल्ली का औसत AQI 378 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि सोमवार शाम को यही आंकड़ा करीब 427 था। यानी हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। शहर के कई इलाकों में प्रदूषण अब भी खतरनाक स्तर से ऊपर बना हुआ है। पूरी राजधानी इस समय जहरीली धुंध की घनी परत से ढकी है, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई है। इसका सीधा असर सड़क पर चलने वाले लोगों और वाहन चालकों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजमर्रा की आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदूषण पर काबू पाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। सोमवार को आयोग ने एक अहम बैठक की, जो दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक थी। इस बैठक की अध्यक्षता अशोक झुनझुनवाला ने की, जबकि सह-अध्यक्ष प्रोफेसर रणदीप गुलेरिया रहे। बैठक के बाद आयोग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई और इससे निपटने के उपायों पर मंथन हुआ।
कुल मिलाकर, दिल्ली की हवा फिलहाल राहत देने के मूड में नहीं है। कोहरा, धुंध और प्रदूषण मिलकर राजधानी के लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाए हुए हैं और हालात सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है।