घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने होम लोन समेत सभी कर्जों की ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद SBI से मिलने वाला होम लोन अब सालाना 7.25 फीसदी की शुरुआती दर से उपलब्ध होगा। ब्याज दरों में यह कमी सीधे तौर पर आपकी मासिक किस्त यानी EMI को हल्का करेगी।
दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में रेपो रेट को 5.50 फीसदी से घटाकर 5.25 फीसदी कर दिया है। इसके बाद से ही बैंकिंग सेक्टर में फिक्स्ड डिपॉजिट और लोन की दरों में कटौती का सिलसिला शुरू हो गया। इससे पहले एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बड़े बैंक होम लोन की ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक की कमी कर चुके हैं। अब SBI के इस फैसले से होम लोन लेने वालों को एक और बड़ा सहारा मिला है।
ब्याज दर में कटौती का असर EMI पर साफ दिखाई देता है। मान लीजिए किसी ग्राहक को पहले 8 फीसदी की दर से होम लोन मिल रहा था और अब वही दर घटकर 7.75 फीसदी हो जाती है। ऐसे में 20 साल की अवधि के लिए 20 लाख रुपये के लोन पर EMI करीब 310 रुपये तक कम हो सकती है। इसी तरह 30 लाख रुपये के लोन पर यह राहत लगभग 465 रुपये महीने तक पहुंच जाती है। यह फायदा नए ग्राहकों के साथ-साथ मौजूदा लोनधारकों को भी मिलेगा, बशर्ते उनका लोन रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट यानी RLLR से जुड़ा हो।
रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर RLLR पर पड़ता है। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों का RLLR भी नीचे आता है और उसी के साथ होम लोन की ब्याज दरें कम हो जाती हैं। RLLR तय करते समय बैंक रेपो रेट के ऊपर अपना मार्जिन जोड़ते हैं, ताकि उनके खर्च और मुनाफे की भरपाई हो सके। इसके बाद ग्राहक के क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर क्रेडिट रिस्क प्रीमियम जोड़ा जाता है और अंतिम ब्याज दर तय होती है।
इस कटौती का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिनका होम लोन फ्लोटिंग रेट पर है और RLLR से लिंक्ड है। ऐसे ग्राहकों की ब्याज दर अगले रीसेट पीरियड में अपने आप कम हो जाएगी। इससे या तो उनकी EMI घटेगी या फिर लोन की अवधि कम हो जाएगी। वहीं जिन लोगों का लोन फिक्स्ड रेट या MCLR से जुड़ा है, वे चाहें तो बैंक से संपर्क कर इसे RLLR में स्विच करा सकते हैं, हालांकि इसके लिए कुछ शुल्क देना पड़ सकता है। खासतौर पर अगर लोन शुरुआती वर्षों में है, तो यह स्विच लंबे समय में ब्याज की बड़ी बचत करा सकता है।
इस साल अब तक RBI तीन बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है और कुल मिलाकर 1 फीसदी की कमी हो चुकी है। फरवरी में करीब पांच साल बाद पहली बार दरें घटाई गई थीं, इसके बाद अप्रैल और अब हालिया बैठक में फिर से कटौती की गई। इसका मकसद कर्ज को सस्ता बनाकर आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देना है।
होम लोन लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। समय से पहले लोन चुकाने पर लगने वाली प्री-पेमेंट पेनल्टी की शर्तें जरूर समझें। साथ ही अपने सिबिल स्कोर को बेहतर बनाए रखें, क्योंकि अच्छा क्रेडिट स्कोर कम ब्याज दर पाने में मदद करता है। इसके अलावा अलग-अलग बैंकों के ऑफर्स की तुलना करना भी समझदारी भरा कदम होता है, ताकि जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में बोझ न बन जाए।
कुल मिलाकर, SBI की इस ब्याज दर कटौती ने होम लोन लेने वालों के लिए सही वक्त का संकेत दिया है। EMI में थोड़ी-थोड़ी राहत लंबे समय में बड़ी बचत में बदल सकती है और घर का सपना पहले से ज्यादा आसान हो सकता है।