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मीशो ने 7 दिन में निवेशकों का पैसा लगभग डबल किया, IPO प्राइस से 95% उछला शेयर; को-फाउंडर विदित आत्रेय बने बिलिनेयर

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ई-कॉमर्स कंपनी मीशो ने शेयर बाजार में आते ही निवेशकों को चौंकाने वाला रिटर्न दिया है। लिस्टिंग के महज 7 दिनों में ही कंपनी के शेयर ने लगभग दोगुना रिटर्न दे दिया है। ₹111 के इश्यू प्राइस से शुरू हुआ मीशो का शेयर अब करीब 95% की तेजी के साथ ₹216.34 के स्तर तक पहुंच गया है। बुधवार, 17 दिसंबर को शेयर 20% के अपर सर्किट के साथ इस स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जिसने निवेशकों के उत्साह को और बढ़ा दिया।

मीशो के शेयरों में यह तेजी लगातार बनी हुई है। बीते 5 कारोबारी दिनों में ही स्टॉक करीब 27% का रिटर्न दे चुका है। 10 दिसंबर को मीशो की BSE और NSE पर लिस्टिंग 50% प्रीमियम के साथ ₹167 पर हुई थी। पहले ही दिन शेयर ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और कारोबार के अंत में ₹170.09 पर बंद हुआ, जो इश्यू प्राइस से 53% से ज्यादा की बढ़त थी। इसके बाद से शेयर में लगातार अपर सर्किट देखने को मिल रहा है।

शेयरों में आई इस जबरदस्त तेजी के साथ मीशो के को-फाउंडर और CEO विदित आत्रेय भी बिलिनेयर क्लब में शामिल हो गए हैं। 34 साल के विदित आत्रेय साल 2015 से मीशो के CEO हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग और स्टॉक में करीब 95% की तेजी के चलते उनकी नेटवर्थ अब एक अरब डॉलर के पार पहुंच गई है। कंपनी में विदित की 11.10% हिस्सेदारी है, जो करीब 47.25 करोड़ शेयरों के बराबर है। मौजूदा शेयर कीमत के आधार पर उनकी संपत्ति लगभग ₹10,222 करोड़ आंकी जा रही है।

मीशो के दूसरे को-फाउंडर संजीव बर्नवाल के पास भी कंपनी के 31.6 करोड़ शेयर हैं। शेयर की मौजूदा कीमत के साथ उनकी संपत्ति भी बढ़कर करीब ₹6,836 करोड़ हो गई है। IIT दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech करने वाले विदित आत्रेय ने अपने करियर की शुरुआत ITC से की थी और बाद में InMobi में काम किया। वहीं संजीव बर्नवाल जापान में नौकरी कर रहे थे, जब दोनों ने मिलकर स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया।

मीशो का IPO कुल ₹5,421 करोड़ का था, जो 3 दिसंबर को खुला और 5 दिसंबर को बंद हुआ। कंपनी ने IPO के लिए ₹105 से ₹111 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। 8 दिसंबर को इसका अलॉटमेंट हुआ। IPO में ₹4,250 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,171 करोड़ का ऑफर फॉर सेल शामिल था। इस इश्यू को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला और यह कुल मिलाकर 81.76 गुना सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशकों की कैटेगरी में इसे करीब 20 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।

IPO से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी अपने भविष्य के विस्तार में लगाएगी। मीशो फ्रेश इश्यू से मिले फंड का उपयोग टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में करेगी। कंपनी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और मशीन लर्निंग टीम्स, मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रही है। इसके अलावा इनऑर्गेनिक ग्रोथ और जनरल कॉर्पोरेट जरूरतों पर भी यह रकम खर्च की जाएगी।

मीशो की कहानी एक साधारण आइडिया से शुरू होकर बड़े बिजनेस बनने की मिसाल है। शुरुआत में विदित और संजीव ने ‘फैशनियर’ नाम से हाइपरलोकल फैशन डिलीवरी ऐप शुरू किया था, जो सफल नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने डिजिटल स्टोरफ्रंट मॉडल पर काम किया, लेकिन असली बदलाव तब आया जब ग्राउंड रिसर्च के दौरान उन्होंने देखा कि छोटे शहरों की महिलाएं व्हाट्सएप के जरिए बुटीक चला रही हैं। वे कपड़ों की तस्वीरें शेयर कर ऑर्डर लेती थीं और बिना दुकान या वेबसाइट के कारोबार कर रही थीं। इसी मॉडल को स्केल करने के विचार से मीशो की नींव पड़ी। ‘मीशो’ नाम ‘माई शॉप’ से लिया गया है।

आज मीशो छोटे दुकानदारों, घरेलू उद्यमियों और महिलाओं को ऑनलाइन बिजनेस का प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहा है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹81,462 करोड़ तक पहुंच चुका है। विदित आत्रेय अक्सर बताते रहे हैं कि उनके पिता चाहते थे कि वे IAS अधिकारी बनें, लेकिन IIT के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि बिजनेस और टेक्नोलॉजी में भी बड़े मौके हैं। एक दोस्त के फोन कॉल से शुरू हुआ सफर आज उन्हें भारत के सबसे युवा अरबपतियों में शामिल कर चुका है।

मीशो न सिर्फ बिजनेस ग्रोथ बल्कि वर्क कल्चर को लेकर भी चर्चा में रहा है। कंपनी ने कर्मचारियों की मानसिक सेहत को ध्यान में रखते हुए ‘रीसेट एंड रिचार्ज’ जैसी पहल शुरू की और लगातार दो साल दिवाली के बाद स्टाफ को लंबी छुट्टी दी। आज मीशो की सफलता स्टार्टअप इंडिया की उस तस्वीर को दिखाती है, जहां छोटे शहरों के आइडिया भी ग्लोबल स्तर की कंपनियां खड़ी कर सकते हैं।

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