स्वस्थ रहने के लिए शरीर को कई जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत होती है और विटामिन C उनमें सबसे अहम माना जाता है। यह न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, बल्कि त्वचा को हेल्दी रखने, घाव भरने की प्रक्रिया तेज करने और शरीर में आयरन के अवशोषण में भी बड़ी भूमिका निभाता है। बावजूद इसके, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान की वजह से बड़ी आबादी रोजाना जरूरी मात्रा में विटामिन C नहीं ले पा रही है, जिसका असर धीरे-धीरे सेहत पर दिखने लगता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में कई जरूरी न्यूट्रिएंट्स का औसत सेवन रिकमेंडेड डाइटरी अलाउंस से काफी कम है। लंबे समय तक यह कमी बनी रहे तो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर होने लगती है। जर्नल ऑफ एकेडमी ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक भारत में लगभग 30 प्रतिशत लोगों में विटामिन C की कमी पाई जाती है। वहीं पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस वन में छपी स्टडी के अनुसार उत्तर भारत में करीब 74 प्रतिशत और दक्षिण भारत में लगभग 46 प्रतिशत आबादी इस कमी से जूझ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण खराब और एकतरफा खानपान माना गया है।
विटामिन C एक वाटर-सॉल्युबल विटामिन है, यानी शरीर इसे खुद नहीं बना सकता और न ही स्टोर करके रख पाता है। अतिरिक्त मात्रा यूरिन के जरिए बाहर निकल जाती है, इसलिए इसे रोजाना डाइट के जरिए लेना बेहद जरूरी होता है। न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि विटामिन C इम्यूनिटी को मजबूत करने के साथ-साथ कोलेजन के निर्माण में मदद करता है, जिससे त्वचा, हड्डियां और टिश्यू मजबूत रहते हैं। यह घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करता है और एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कोशिकाओं को डैमेज से बचाता है।
अगर फूड सोर्स की बात करें तो विटामिन C सिर्फ संतरे तक सीमित नहीं है। आंवला, अमरूद, स्ट्रॉबेरी, कीवी, पपीता, नींबू, शिमला मिर्च, ब्रोकली और हरी पत्तेदार सब्जियों में यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है। हैरानी की बात यह है कि आंवला और अमरूद जैसे फल संतरे से कई गुना ज्यादा विटामिन C देते हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज एक संतरा, एक आंवला, एक कप स्ट्रॉबेरी या पपीते की छोटी कटोरी भी दिनभर की जरूरत पूरी करने के लिए काफी हो सकती है।
आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना करीब 75 से 90 मिलीग्राम विटामिन C की जरूरत होती है, हालांकि उम्र, गर्भावस्था, तनाव और शारीरिक स्थिति के अनुसार यह मात्रा बदल सकती है। समस्या तब शुरू होती है, जब शरीर को लंबे समय तक यह जरूरी मात्रा नहीं मिल पाती। विटामिन C की कमी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए लोग इन्हें अक्सर सामान्य थकान या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। बार-बार सर्दी-जुकाम होना, जल्दी थक जाना, मसूड़ों से खून आना, घाव भरने में ज्यादा समय लगना, स्किन का रूखा और बेजान दिखना इसके आम संकेत माने जाते हैं।
कुछ लोगों में विटामिन C की कमी का खतरा दूसरों की तुलना में ज्यादा रहता है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, लंबे समय से तनाव में रहने वाले लोग, स्मोकिंग या शराब का सेवन करने वाले, अनहेल्दी डाइट लेने वाले और गंभीर बीमारियों या हालिया सर्जरी से गुजर चुके लोगों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में शरीर की जरूरत बढ़ जाती है या अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता।
अक्सर यह सवाल भी उठता है कि क्या विटामिन C सप्लीमेंट लेना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में संतुलित डाइट से इसकी जरूरत आसानी से पूरी हो जाती है। सप्लीमेंट तभी लेना चाहिए, जब डाइट से पर्याप्त मात्रा न मिल पा रही हो, बार-बार संक्रमण हो रहा हो, इम्यूनिटी कमजोर हो या डॉक्टर जांच के बाद कमी की पुष्टि करें। बिना सलाह हाई-डोज सप्लीमेंट लेना नुकसानदेह भी हो सकता है।
डॉ. अनु अग्रवाल के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा विटामिन C खासतौर पर सप्लीमेंट के रूप में लेने से पेट दर्द, दस्त और किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि यह समस्या तब होती है, जब लंबे समय तक 2000 मिलीग्राम प्रतिदिन जैसी बहुत ज्यादा मात्रा ली जाए। रोजमर्रा के फलों और सब्जियों से मिलने वाले विटामिन C से आमतौर पर कोई नुकसान नहीं होता।
कुल मिलाकर, थोड़ी सी समझदारी और संतुलित खानपान से विटामिन C की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है। रोज की डाइट में ताजे फल और सब्जियां शामिल कर आप न सिर्फ बार-बार बीमार पड़ने से बच सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक खुद को फिट और एनर्जेटिक भी रख सकते हैं।