छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DSP कल्पना वर्मा प्रकरण में एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन ने राज्य के डीजीपी अरुण गौतम और आईजी अमरेश मिश्रा को पत्र लिखकर DSP कल्पना वर्मा के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अपने पत्र में टंडन ने दावा किया है कि महादेव सट्टा एप से जुड़े पैनल को संचालित करने से इनकार करने के बाद उनके और DSP कल्पना वर्मा के बीच रिश्ते पूरी तरह टूट गए थे, जिसके बाद यह विवाद गहराता चला गया।
दीपक टंडन ने पत्र में खुद को रायपुर के गायत्री नगर का निवासी और होटल व्यवसाय से जुड़ा बताया है। उनका कहना है कि पिछले करीब पांच वर्षों से उनका DSP कल्पना वर्मा से संपर्क था और इस दौरान दोनों परिवारों के बीच भी करीबी रिश्ते बने। टंडन के अनुसार, यही नजदीकियां बाद में विवाद और टकराव का कारण बन गईं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस पूरे घटनाक्रम में उन्हें और उनके कारोबार को दो करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
कारोबारी ने अपने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि DSP कल्पना वर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग किया और आर्थिक शोषण व ब्लैकमेलिंग जैसी गतिविधियों में शामिल रहीं। टंडन का दावा है कि कल्पना वर्मा और उनके परिजनों, खासकर उनके पिता हेमंत वर्मा के बैंक खातों में लगातार लेन-देन होता रहा, जिसका विवरण उन्होंने सबूतों के तौर पर पत्र के साथ संलग्न किया है। उनका आरोप है कि इन लेन-देन के जरिए उन्हें दबाव में रखा गया।
पत्र में महादेव सट्टा एप का जिक्र करते हुए टंडन ने कहा है कि DSP कल्पना वर्मा ने दंतेवाड़ा में उन्हें सट्टा पैनल संचालित करने का ऑफर दिया था। जब उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और बाद में संपर्क पूरी तरह खत्म हो गया। टंडन का कहना है कि इस दावे के समर्थन में उनके पास मोबाइल चैट्स मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने शिकायत के साथ जोड़ा है।
विवाद सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। टंडन ने VIP रोड स्थित होटल एटमॉसफेरिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि DSP कल्पना वर्मा, उनके पिता हेमंत वर्मा और भाई राकेश वर्मा ने साजिश के तहत इस होटल को गैरकानूनी तरीके से अपने नाम पर रजिस्टर्ड करा लिया। टंडन के अनुसार, होटल की खरीद-फरोख्त में उन्होंने बैंक के जरिए RTGS से 30 लाख रुपये का भुगतान किया था, इसके अलावा नगद और अन्य ट्रांजैक्शन भी किए गए थे।
कारोबारी ने यह भी आरोप लगाया है कि रिश्तों में दरार आने के बाद उन्हें लगातार ब्लैकमेल किया गया। पत्र में पत्नी से तलाक लेने का दबाव, फर्जी मामलों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी, यहां तक कि उनकी पत्नी के नाम से रजिस्टर्ड हाइराइडर वाहन को अपने कब्जे में रखने जैसे आरोप लगाए गए हैं। टंडन का कहना है कि इन घटनाओं से उनका पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है और उन्हें अपनी जान का भी खतरा महसूस हो रहा है।
यह मामला तब और सुर्खियों में आया जब यह सामने आया कि वर्ष 2021 में DSP कल्पना वर्मा महासमुंद में पदस्थ थीं और उसी दौरान एक म्यूचुअल फ्रेंड के जरिए उनकी पहचान दीपक टंडन से हुई थी। इसके बाद बातचीत, मुलाकातें और साथ घूमने-फिरने तक की बातें सामने आईं, जो बाद में निजी रिश्तों में बदल गईं। अक्टूबर महीने में टंडन ने खम्हारडीह थाने में इस पूरे मामले को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई थी, जिसमें पैसे, गाड़ी और ज्वेलरी वापस न मिलने का आरोप लगाया गया था। शुरुआती स्तर पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद मामला मीडिया के जरिए सामने आया।
वहीं, DSP कल्पना वर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि दीपक टंडन उन पर कोर्ट से केस वापस लेने का दबाव बना रहे थे और ऐसा न होने पर फर्जी चैट्स व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल की गईं। वायरल वीडियो को लेकर भी उन्होंने सफाई दी है कि वह केवल बकाया पैसे लेने के लिए होटल गई थीं। DSP कल्पना वर्मा का दावा है कि वह पूरे मामले में कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
अब दीपक टंडन द्वारा डीजीपी और आईजी को भेजे गए पत्र के बाद एक बार फिर इस पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और जांच किस दिशा में जाती है।