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ऑल टाइम हाई के बाद चांदी फिसली, सोना भी नरम: एक दिन में चांदी ₹784 सस्ती, सोना ₹80 घटकर ₹1,32,394 पर

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कीमती धातुओं के बाजार में आज, 19 दिसंबर को हल्की ठंडक देखने को मिली। ऑल टाइम हाई छूने के ठीक एक दिन बाद चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी मामूली रूप से सस्ता हुआ है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 10 ग्राम सोने का भाव 80 रुपये घटकर 1,32,394 रुपये पर आ गया है। इससे पहले गुरुवार को सोना 1,32,474 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। उल्लेखनीय है कि 15 दिसंबर को सोने ने 1,33,249 रुपये प्रति 10 ग्राम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छुआ था।

चांदी की बात करें तो आज इसके दाम में 784 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है और यह 2,00,336 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। गुरुवार को ही चांदी 2,01,120 रुपये प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर पहुंची थी, जिसके बाद मुनाफावसूली के चलते इसमें हल्की गिरावट देखी जा रही है।

अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के रेट अलग दिखने की एक बड़ी वजह यह है कि IBJA द्वारा जारी कीमतों में 3 फीसदी जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण स्थानीय बाजारों में दाम इससे ज्यादा नजर आते हैं। IBJA के रेट का इस्तेमाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के भाव तय करने में करता है और कई बैंक गोल्ड लोन की वैल्यू इसी आधार पर निर्धारित करते हैं।

अगर पूरे साल की तस्वीर देखें तो सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। साल की शुरुआत यानी 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपये का था, जो अब बढ़कर 1,32,394 रुपये हो गया है। यानी इस साल अब तक सोना 56,232 रुपये महंगा हो चुका है। चांदी में तेजी इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली रही है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी 86,017 रुपये की थी, जो अब 2,00,336 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस तरह चांदी में सालभर में 1,14,319 रुपये की बढ़त दर्ज हुई है।

सोने में इस तेजी के पीछे कई अहम कारण रहे हैं। अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती के संकेतों से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोने को होल्ड करने की लागत घटी और निवेशकों का रुझान बढ़ा। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण सोना एक बार फिर सबसे सुरक्षित निवेश के रूप में उभरा। वहीं चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। अनुमान है कि सालभर में केंद्रीय बैंकों की खरीद 900 टन से ज्यादा रही है, जिसने कीमतों को ऊपर बनाए रखा।

चांदी की तेजी के पीछे भी ठोस वजहें हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में बढ़ते इस्तेमाल के चलते चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल बन गई है। इसके साथ ही अमेरिका में संभावित टैरिफ पॉलिसी को लेकर डर के कारण कंपनियों ने चांदी का स्टॉक बढ़ाया, जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव आया। कई मैन्युफैक्चरर्स ने भविष्य में प्रोडक्शन रुकने की आशंका में पहले ही भारी खरीदारी कर ली, जिसका असर कीमतों पर साफ दिखा।

सोना खरीदते समय कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदना चाहिए, जिससे शुद्धता को लेकर कोई संदेह न रहे। इसके साथ ही खरीदारी से पहले सोने के वजन और उस दिन के ताजा रेट को IBJA जैसी विश्वसनीय वेबसाइटों से जरूर जांच लेना चाहिए, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम अलग-अलग होते हैं।

शहरों के हिसाब से सोने के रेट अलग होने के पीछे भी कई वजहें हैं। ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी का खर्च, स्थानीय मांग, ज्वेलरी एसोसिएशनों की भूमिका और ज्वेलर्स द्वारा खरीदे गए स्टॉक की लागत, ये सभी फैक्टर मिलकर शहर-दर-शहर कीमतों में अंतर पैदा करते हैं। यही कारण है कि एक ही दिन में अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के भाव थोड़े ऊपर-नीचे नजर आते हैं।

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