रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। सूर्य को ऊर्जा, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और पितृ तत्व का कारक ग्रह कहा गया है। मान्यता है कि रविवार को सूर्य से जुड़े सरल और श्रद्धापूर्वक किए गए उपाय न केवल शारीरिक कष्टों को कम करते हैं, बल्कि जीवन में संतुलन, सम्मान और प्रगति के द्वार भी खोलते हैं। यदि लंबे समय से बाधाएं, मानसिक दबाव या अस्थिरता बनी हुई हो, तो रविवार के ये उपाय सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकते हैं।
जीवन में विजय और मजबूती की कामना रखने वालों के लिए रविवार का दिन विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन केन के पौधे के प्रति आदर भाव रखते हुए उसे प्रणाम करना और उसकी जड़ में स्वच्छ जल अर्पित करना शुभ संकेत माना जाता है। विश्वास किया जाता है कि इससे आत्मबल बढ़ता है और पराजय का भय कम होता है। यदि यह पौधा आसपास उपलब्ध न हो, तो उसकी तस्वीर के सामने भी श्रद्धा भाव व्यक्त किया जा सकता है, बस इस दिन उससे जुड़ी किसी भी वस्तु को नुकसान न पहुंचाया जाए।
यदि जीवन की उलझनें लगातार बढ़ रही हों और समाधान दूर नजर आ रहा हो, तो रविवार से एक विशेष क्रम आरंभ किया जा सकता है। प्रतिदिन नीले रंग का एक फूल लेकर घर से बाहर किसी अनुपयोगी या गंदे जल प्रवाह में प्रवाहित किया जाए और यह क्रम अगले पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र तक जारी रखा जाए। ऐसा माना जाता है कि इससे नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होने लगती है और मन हल्का महसूस करता है।
व्यवसाय या कार्यक्षेत्र में रुकावट महसूस हो रही हो, तो रविवार को मिट्टी के पात्र में शहद भरकर उसे ढककर पूरे दिन घर के उत्तर-पश्चिम कोने में रखने की परंपरा बताई गई है। अगले दिन मन ही मन उन्नति की कामना करते हुए उस पात्र को किसी शांत और एकांत स्थान पर छोड़ दिया जाता है। विश्वास है कि इससे कामकाज में गति और अवसर बढ़ते हैं।
दांपत्य जीवन में विश्वास और मिठास बनाए रखने के लिए रविवार को गुड़ से बनी किसी वस्तु का दान शुभ माना गया है। यदि मिठाई उपलब्ध न हो, तो साधारण गुड़ का दान भी पर्याप्त माना जाता है। यह उपाय संबंधों में स्थायित्व और अपनापन बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।
आंखों से जुड़ी समस्याओं से बचाव के लिए रविवार को स्नान के बाद सूर्य देव को प्रणाम कर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे न केवल नेत्रों की बल्कि मानसिक स्पष्टता की भी रक्षा होती है।
यदि वैवाहिक जीवन की खुशियां फीकी पड़ गई हों, तो रविवार की रात सोते समय दो कपूर की टिकिया और थोड़ी रोली सिरहाने रखी जाती है। सुबह उठकर कपूर को घर के बाहर जला दिया जाता है और रोली को जल में मिलाकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। यह उपाय आपसी सामंजस्य और सौहार्द बढ़ाने का संकेत देता है।
दांपत्य जीवन में किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप की आशंका हो, तो रविवार को एक मुट्ठी मसूर की दाल लेकर उसे जीवनसाथी के हाथों से सात बार स्पर्श कराया जाता है और फिर साफ बहते जल में प्रवाहित कर दिया जाता है। इसे संबंधों की रक्षा का उपाय माना जाता है।
पिता के साथ संबंधों में मधुरता लाने के लिए रविवार को सूर्य देव के मंत्र ‘ॐ ह्रां ह्रीं हौं सः सूर्याय नमः’ का 51 बार जप करने की मान्यता है। यह अभ्यास सम्मान, संवाद और समझ बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
मानसिक तनाव या उदासी की स्थिति में रविवार को स्नान के बाद पहले अपने इष्ट देव को नमन करें, फिर चंदन की सुगंध वाली धूपबत्ती जलाकर कुछ समय शांत भाव से खड़े रहें। इससे मन को स्थिरता और सुकून मिलने की परंपरागत मान्यता है।
स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना रखने वालों के लिए रविवार को ‘ॐ घृणिः सूर्याय नमः’ मंत्र का 108 बार जप करना शुभ बताया गया है। इसे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार से जोड़ा जाता है।
संतान के भविष्य को लेकर चिंता हो, तो रविवार को उसकी सहभागिता से किसी जरूरतमंद को काला कंबल दान करवाने की परंपरा बताई जाती है। यह उपाय संतान के जीवन में सुरक्षा और सही दिशा की कामना का प्रतीक माना जाता है।
करियर में उन्नति या मनचाही नौकरी की इच्छा रखने वालों के लिए रविवार को सिंघाड़े के आटे की रोटियां बनवाकर उन पर दो मूली रखकर किसी मंदिर या धर्मस्थल पर स्वयं जाकर दान करने का उल्लेख मिलता है। इसे कर्मक्षेत्र में प्रगति का संकेत माना जाता है।
रविवार के ये सभी उपाय श्रद्धा, संयम और सकारात्मक सोच के साथ किए जाएं, तो व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और स्थिरता का अनुभव बढ़ता है। सूर्य देव की कृपा से धीरे-धीरे बाधाएं कम होती हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।