घने कोहरे के चलते सड़क हादसों के बढ़ते खतरे को देखते हुए Yamuna Expressway पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। अब रोजाना शाम 5 बजे के बाद एक्सप्रेसवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। तय समय के बाद अगर कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली एक्सप्रेसवे पर पाई गई, तो उसे क्रेन की मदद से नीचे उतार दिया जाएगा। यह जानकारी एक्सप्रेसवे के वरिष्ठ प्रबंधक जेके शर्मा ने दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में मथुरा में हुए सड़क हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर निगरानी और सख्त कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अक्सर हादसों की बड़ी वजह बनती हैं। ये वाहन न सिर्फ धीमी गति से चलते हैं, बल्कि अधिकतर मामलों में ओवरलोड भी होते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनमें पीछे की ओर पर्याप्त लाइट या रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते, जिससे तेज रफ्तार में आ रहे वाहन चालकों को समय पर इनका अंदाजा नहीं लग पाता और गंभीर दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
इन्हीं खतरों को ध्यान में रखते हुए शाम 5 बजे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को टोल बूथ से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कोहरे के दौरान जब दृश्यता 50 मीटर से कम हो जाएगी, तब वाहनों को रोककर नियंत्रित तरीके से आगे निकाला जाएगा। बीते रविवार को इसी नियम के तहत एक्सप्रेसवे पर काफिले यानी कॉनवॉय के जरिए गाड़ियों को सुरक्षित रूप से गुजरवाया गया था।
कोहरे के मौसम को देखते हुए स्पीड लिमिट को लेकर भी पहले से सख्त नियम लागू हैं। गौतमबुद्ध नगर ट्रैफिक पुलिस ने जिले की प्रमुख सड़कों और एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति कम कर दी है। यह संशोधित स्पीड लिमिट 15 दिसंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में यमुना एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों के लिए अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।
गौरतलब है कि गर्मियों के मौसम में यही स्पीड लिमिट हल्के वाहनों के लिए 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। प्रशासन का साफ कहना है कि सर्दियों में कोहरे के कारण जोखिम कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इन्हीं हालात को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली की नो-एंट्री और सख्त स्पीड लिमिट को यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम माना जा रहा है।