रायपुर में सामने आए बहुचर्चित समाज कल्याण घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। Central Bureau of Investigation की अब तक की पड़ताल में स्टेट रिसोर्स सेंटर (एसआरसी) के खर्चों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी क्रम में एजेंसी विभाग से जुड़े कई रिटायर्ड अफसरों को पूछताछ के लिए तलब करने की तैयारी में है। जांच के दायरे में दो पूर्व मुख्य सचिवों सहित कुल सात आईएएस अधिकारियों के नाम आने की चर्चा है। आरोप है कि फर्जी एनजीओ के जरिए सरकारी फंड का दुरुपयोग कर हजार करोड़ रुपये तक की हेराफेरी की गई, जबकि वास्तविक खर्च बेहद सीमित रहा।
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने करीब तीन माह पहले समाज कल्याण विभाग के कार्यालय से अहम फाइलें जब्त कर ली थीं। Chhattisgarh High Court के आदेश पर चल रही इस जांच में दिव्यांगों के कल्याण के लिए केंद्र से मिले अनुदान की भी गहन पड़ताल हो रही है। आरोपोंों के अनुसार, दिव्यांग कल्याण के नाम पर ‘स्टेट रिसोर्स सेंटर’ नामक एनजीओ बनाया गया, जिसका कार्यालय माना क्षेत्र में बताया जाता है। सीबीआई टीम वहां की सुविधाओं का निरीक्षण कर चुकी है और फर्जी नियुक्तियों, कर्मचारियों के वेतन के नाम पर गबन तथा कागजी कामकाज में हेराफेरी के आरोपों की परत-दर-परत जांच कर रही है।
जांच एजेंसी के सामने आए तथ्यों में दावा किया गया है कि इस एनजीओ के माध्यम से लगभग 14 वर्षों तक सरकारी धन की निकासी की गई। इसमें फर्जी नियुक्तियां, डबल सैलरी भुगतान और मनगढ़ंत बिलों के जरिए राशि निकालने जैसे तरीके अपनाए गए। वर्तमान में बिल-वाउचर का सत्यापन जारी है और कर्मचारियों से जुड़ी पूरी जानकारी खंगाली जा रही है, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही जा रही है। बताया जाता है कि जहां घोटाले का दावा हजार करोड़ रुपये तक का है, वहीं वास्तविक खर्च पांच करोड़ रुपये के आसपास ही पाया गया।
सीबीआई अब उन अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिन्होंने अलग-अलग समय पर स्टेट रिसोर्स सेंटर से जुड़े कामकाज की निगरानी की थी। इनमें से कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जांच एजेंसी का फोकस जिम्मेदारी तय करने और फंड के दुरुपयोग की पूरी कड़ी उजागर करने पर है, ताकि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके।