दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाने की मांग को लेकर चल रही सुनवाई में केंद्र सरकार ने साफ रुख अपनाया है। सरकार ने Delhi High Court को बताया कि एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता और इसलिए इस पर जीएसटी कम करने का सवाल ही नहीं उठता। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि GST Council एक संवैधानिक संस्था है और टैक्स दरों में बदलाव की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसे दरकिनार नहीं किया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई अब 9 जनवरी 2026 को होगी।
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल N. Venkataraman ने दलील दी कि जीएसटी में किसी भी तरह की रियायत मनमाने तरीके से नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस मानने का अधिकार स्वास्थ्य मंत्रालय के पास होता है, जबकि याचिका में Ministry of Health and Family Welfare को पक्षकार ही नहीं बनाया गया है। ऐसे में टैक्स वर्गीकरण बदलने की मांग प्रक्रिया के खिलाफ है।
केंद्र सरकार ने याचिका के उद्देश्य पर भी सवाल उठाए। एएसजी ने कोर्ट को बताया कि यह याचिका किसी विशेष कंपनी या व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की मंशा से दायर की गई हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर Ministry of Finance में उच्च स्तर पर चर्चा हो चुकी है और सरकार का मानना है कि इस याचिका को औपचारिक अभ्यावेदन में बदला जाना चाहिए, ताकि सभी पहलुओं की विधिवत जांच की जा सके।
सरकार ने मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 10 दिन का वक्त दिया और अगली तारीख 9 जनवरी 2026 तय कर दी। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार को सख्त रुख अपनाने की हिदायत दी थी और GST Council की बैठक जल्द बुलाने का भी निर्देश दिया था। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि एयर प्यूरीफायर को लेकर टैक्स नीति में किसी तरह की राहत की गुंजाइश बनती है या नहीं।