नए वित्तीय सत्र 2026–27 की शुरुआत से पहले ही बिजली उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ती दिख रही है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सामने छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने जो नई टैरिफ याचिका पेश की है, उसमें करीब छह हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया गया है। इस दावे के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि आने वाले सत्र में बिजली दरों में बढ़ोतरी का दबाव बनेगा, हालांकि अंतिम फैसला नियामक आयोग जनसुनवाई और आंकड़ों की जांच के बाद ही करेगा।
नियमों के अनुसार पावर कंपनी को दिसंबर में अगले सत्र के टैरिफ के लिए याचिका दाखिल करनी होती है। इस बार कंपनी ने 31 दिसंबर तक का समय मांगा था, लेकिन उससे एक दिन पहले ही 30 दिसंबर को पूरी याचिका आयोग के समक्ष रख दी गई। इसमें नए सत्र में संभावित आय, खर्च, पुराने घाटे और मौजूदा वित्तीय स्थिति का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। कंपनी का कहना है कि नए सत्र की संभावित कमाई को पुराने घाटे से समायोजित करने के बाद भी उसे लगभग छह हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की जरूरत पड़ेगी, जिसे पूरा करने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी जरूरी है।
पिछले अनुभव को देखें तो पावर कंपनी और आयोग के आकलन में बड़ा अंतर रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए कंपनी ने करीब पांच हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया था, लेकिन आयोग ने गहन जांच के बाद इसे सिर्फ करीब पांच सौ करोड़ रुपये माना। कंपनी की ओर से मांगी गई वार्षिक राजस्व आवश्यकता में भी कटौती की गई थी और बिजली बिक्री के अनुमान को बढ़ाकर माना गया था। इसी वजह से उस समय अगर कंपनी का पूरा घाटा स्वीकार कर लिया जाता, तो बिजली दरों में 20 फीसदी तक इजाफा करना पड़ता, लेकिन आयोग द्वारा सीमित घाटा मानने के चलते दरें दो फीसदी से भी कम बढ़ीं।
अब नए सत्र के लिए दायर याचिका ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है कि आयोग पावर कंपनी के दावे को कितनी हद तक स्वीकार करता है। आयोग जितना घाटा मान्य करेगा, उसी अनुपात में नया टैरिफ तय होगा। इससे पहले जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें उपभोक्ता, उद्योग और अन्य हितधारक अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकेंगे।
कुल मिलाकर, संकेत साफ हैं कि बिजली की कीमतों को लेकर एक बार फिर बहस तेज होने वाली है। उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या महंगाई का नया झटका लगेगा, यह पूरी तरह नियामक आयोग के फैसले और जनसुनवाई के नतीजों पर निर्भर करेगा।