नए साल की शुरुआत चांदी के निवेशकों के लिए काफ़ी उतार–चढ़ाव भरी रही है। 2 जनवरी की सुबह अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट में चांदी 72.58 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी। दिन के स्तर पर इसमें हल्की रिकवरी जरूर आई, लेकिन साप्ताहिक आधार पर चांदी अब भी करीब 8.35 फीसदी नीचे बनी हुई है। घरेलू बाजार में भी यही रुख देखने को मिला, जहां तेज उछाल के बाद करेक्शन ने निवेशकों को चौंका दिया।
भारतीय कमोडिटी बाजार में Multi Commodity Exchange यानी MCX पर चांदी के फ्यूचर्स में शुक्रवार सुबह मजबूती दिखी और भाव करीब 1.9 फीसदी उछलकर 2.40 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। इसके बावजूद दिसंबर के अंत में बने ऑल-टाइम हाई से चांदी अब भी 5 फीसदी से ज्यादा नीचे है, जो बताता है कि बाजार में दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मार्जिन नियमों में बदलाव मानी जा रही है। Augmont Bullion की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर के आखिरी हफ्ते में चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी और 30 दिसंबर को 84 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। लेकिन इसके बाद महज दो दिनों में बाजार का मूड पूरी तरह बदल गया और कीमतों में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ गई।
असल ट्रिगर अमेरिका के CME Group का फैसला बना। 26 दिसंबर 2025 को एक्सचेंज ने मार्च 2026 के सिल्वर फ्यूचर्स पर शुरुआती मार्जिन बढ़ाया और इसके बाद 30 दिसंबर को मार्जिन में करीब 30 फीसदी की और सख्ती कर दी गई। इससे ट्रेडर्स पर अतिरिक्त कैश का दबाव बढ़ गया। जैसे ही न्यूयॉर्क बाजार खुला, मार्जिन कॉल पूरी न कर पाने वाले निवेशकों की मजबूरन बिकवाली शुरू हो गई और कुछ ही घंटों में चांदी की अरबों डॉलर की वैल्यू साफ हो गई।
घरेलू हाजिर बाजार में भी इसका असर दिखा। Indian Bullion Jewellers Association के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर के आखिरी दिनों की तेजी के बाद जनवरी की शुरुआत में भाव फिसलते नजर आए। बड़े शहरों में कीमतों में ज्यादा फर्क नहीं दिखा, सिर्फ स्थानीय टैक्स और ज्वेलर मार्जिन के कारण मामूली अंतर नजर आया।
आगे के रुझान पर नजर डालें तो बाजार फिलहाल स्थिरता की ओर बढ़ता दिख रहा है। ऑगमॉन्ट बुलियन का अनुमान है कि इतनी तेज गिरावट और रिकवरी के बाद चांदी अब कुछ समय के लिए सीमित दायरे में कारोबार कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 70 से 76 डॉलर प्रति औंस और घरेलू स्तर पर करीब 2.23 लाख से 2.42 लाख रुपये प्रति किलो का रेंज फिलहाल अहम माना जा रहा है। यानी निकट भविष्य में बड़ी तेजी या गिरावट से ज्यादा, कंसोलिडेशन का दौर देखने को मिल सकता है।