भोपाल में आयोजित 68वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ ने वह कर दिखाया, जिसका इंतज़ार वर्षों से था। प्रांजु सोमानी ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज—कुल चार पदक अपने नाम किए और राज्य के खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। यह पहली बार है जब किसी छत्तीसगढ़ी खिलाड़ी ने नेशनल शूटिंग में इतने पदक जीते हैं, और इससे भी बड़ी बात यह कि 25 वर्षों का मेडल सूखा एक झटके में खत्म हो गया।
प्रांजु का यह प्रदर्शन सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं रहा। 632.5 के प्रभावशाली स्कोर के साथ उन्होंने सिविलियन कैटेगरी में नया नेशनल रिकॉर्ड भी कायम किया। चार अलग-अलग कैटेगरी में उनकी चमक ने साबित कर दिया कि यह जीत किसी एक दिन का करिश्मा नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और मानसिक मजबूती का नतीजा है। 10 मीटर एयर राइफल सिविलियन सीनियर और जूनियर कैटेगरी में गोल्ड, सब-युथ में सिल्वर और सीनियर कैटेगरी में ब्रॉन्ज—हर स्तर पर उनका दबदबा दिखा।
इस ऐतिहासिक सफर में प्रशिक्षण और सपोर्ट सिस्टम की भूमिका भी अहम रही। प्रांजु Topgun Shooting Academy में अभ्यास करती हैं और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और कोच गोपाल दुबे को दिया है। अनुशासन, नियमित अभ्यास और मानसिक संतुलन—इन तीनों ने मिलकर उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
छत्तीसगढ़ के लिए यह उपलब्धि गर्व का क्षण है। प्रांजु की जीत ने न सिर्फ राज्य का नाम राष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है, बल्कि शूटिंग जैसे खेलों के प्रति नई पीढ़ी में भरोसा और उत्साह भी जगाया है। यह प्रदर्शन संकेत है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें, तो छत्तीसगढ़ से भी देश को चैंपियन मिल सकते हैं—और प्रांजु सोमानी ने इसकी शुरुआत कर दी है।