देशभर के लाखों गिग वर्कर्स—खासकर फूड डिलीवरी और राइड-शेयरिंग से जुड़े लोगों—के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने भारत सरकार के सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत नए ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं, जिनके लागू होने पर Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स को हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट कवर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल इन नियमों पर स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा गया है, जिसके बाद इन्हें अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा। हालिया हड़ताल के बाद इस कदम को गिग वर्कर्स के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
ड्राफ्ट के मुताबिक, किसी भी फूड या राइड-शेयरिंग ऐप से जुड़े वर्कर्स को सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसमें प्लेटफॉर्म कंपनियां मदद करेंगी। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार नंबर अनिवार्य होगा और उम्र कम से कम 16 साल होनी चाहिए। जैसे ही डेटा शेयर होगा, एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर जेनरेट किया जाएगा और वर्कर को डिजिटल आईडी कार्ड मिलेगा, जिसमें उसकी फोटो और जरूरी विवरण होंगे। मोबाइल नंबर, पता या स्किल में बदलाव होने पर जानकारी पोर्टल पर अपडेट करनी होगी, वरना लाभ रुक सकते हैं।
हालांकि, सभी गिग वर्कर्स को अपने-आप ये फायदे नहीं मिलेंगे। पात्रता के लिए एक साल में कम से कम 90 दिन एक ही कंपनी के साथ काम करना जरूरी होगा। अगर कोई वर्कर एक साथ कई ऐप्स पर काम करता है, तो कुल 120 दिन का काम होना चाहिए। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एक ही दिन में अलग-अलग कंपनियों के लिए की गई डिलीवरी को अलग-अलग कार्यदिवस माना जाएगा। 60 साल की उम्र पूरी होने या निर्धारित अवधि तक काम न करने पर पात्रता खत्म हो सकती है।
इन नियमों के तहत सरकार कंपनियों से योगदान लेकर एक अलग सोशल सिक्योरिटी फंड बनाएगी। इसी फंड से गिग वर्कर्स को लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा, जबकि काम के दौरान दुर्घटना होने पर पर्सनल एक्सीडेंट कवर का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा पेंशन और अन्य नई योजनाओं पर सुझाव देने के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में गिग वर्कर्स के पांच प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे, जो रोटेशन के आधार पर काम करेंगे।
गौरतलब है कि 25 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स ने सांकेतिक हड़ताल की थी, जिसके बाद कंपनियों ने पीक ऑवर्स में ज्यादा इंसेंटिव देने की घोषणा की। जोमैटो ने शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक प्रति ऑर्डर 120–150 रुपये देने की बात कही, जबकि स्विगी ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी के दौरान 10,000 रुपये तक कमाई की संभावना जताई थी। हड़ताल के पीछे सोशल सिक्योरिटी की कमी, घटती कमाई, खराब वर्किंग कंडीशन, मनमाने ढंग से आईडी ब्लॉक करना और गिग वर्कर के कानूनी दर्जे जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
कुल मिलाकर, ये ड्राफ्ट नियम गिग इकॉनमी में काम करने वालों के लिए सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। फाइनल नियम लागू होते ही डिलीवरी पार्टनर्स और राइडर्स को पहली बार संगठित सोशल सिक्योरिटी ढांचे का लाभ मिल सकता है।