नई दिल्ली में डिजिटल अनुशासन को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय MeitY ने औपचारिक नोटिस जारी कर कंपनी के एआई टूल Grok के दुरुपयोग पर गंभीर आपत्ति जताई है। सरकार का कहना है कि Grok के जरिए अश्लील, यौन रूप से आपत्तिजनक और समाज के लिए घातक कंटेंट का सृजन व प्रसार हो रहा है, जिसमें महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार यह मामला आईटी एक्ट और उससे जुड़े नियमों के स्पष्ट उल्लंघन का संकेत देता है। नोटिस में X को चेताया गया है कि वह Grok के तकनीकी ढांचे और गवर्नेंस फ्रेमवर्क की तत्काल समीक्षा करे, प्लेटफॉर्म से अवैध व आपत्तिजनक सामग्री हटाए, दोषी यूजर्स पर कार्रवाई सुनिश्चित करे और 72 घंटे के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपे। सरकार ने यह भी साफ किया है कि निर्देशों की अनदेखी की गई तो कंपनी से सेफ हार्बर प्रोटेक्शन छीना जा सकता है और साइबर, आपराधिक तथा बाल संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है।
यह कार्रवाई शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी की शिकायत के बाद तेज हुई। उन्होंने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर Grok के खतरनाक इस्तेमाल की ओर ध्यान दिलाया था। सांसद के मुताबिक X पर एक नया ट्रेंड उभर रहा है, जहां कुछ यूजर्स महिलाओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें यौन रूप से प्रस्तुत करने जैसे घिनौने कामों के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने इसे निजता और गरिमा पर सीधा हमला बताते हुए इसे न सिर्फ अनैतिक बल्कि आपराधिक करार दिया।
सूचना प्रौद्योगिकी और संचार पर बनी संसदीय स्थायी समिति की सदस्य के रूप में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत महिलाओं की गरिमा के साथ हो रहे डिजिटल अपराधों पर आंख मूंदकर नहीं बैठ सकता। उनका जोर है कि एआई प्लेटफॉर्म्स में मजबूत सुरक्षा उपाय अनिवार्य हों, ताकि तकनीक अपराध का औजार न बने। नोटिस जारी होने के बाद उन्होंने त्वरित कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया और इसे ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया।
भारत के साथ-साथ विदेशों में भी Grok AI को लेकर चिंताएं गहराई हैं। फ्रांस में पेरिस के अभियोजक कार्यालय ने X के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाया है। वहां आरोप है कि Grok की मदद से सेक्सुअल डीपफेक तैयार किए जा रहे हैं। दो सांसदों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में यह परखा जा रहा है कि क्या प्लेटफॉर्म ने डिजिटल सुरक्षा, सहमति और महिला संरक्षण कानूनों का उल्लंघन किया है। संकेत साफ हैं—एआई की आज़ादी के साथ जवाबदेही भी अब टालने की गुंजाइश नहीं बची।