दुनिया के इलेक्ट्रिक व्हीकल बाज़ार में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। साल 2025 में चीनी ऑटो दिग्गज BYD ने बिक्री के मामले में Tesla को पीछे छोड़ते हुए खुद को दुनिया की सबसे बड़ी EV कंपनी के रूप में स्थापित कर लिया है। आंकड़ों के मुताबिक, BYD ने 2025 में करीब 22.5 लाख इलेक्ट्रिक कारें बेचीं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत की शानदार बढ़त को दर्शाता है। इसके उलट टेस्ला की बिक्री इस दौरान घटकर लगभग 16.4 लाख यूनिट रह गई, यानी कंपनी को लगातार दूसरे साल गिरावट का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ला की घटती बिक्री के पीछे दो अहम वजहें हैं। एक तरफ कंपनी के सीईओ Elon Musk के राजनीतिक बयानों और दक्षिणपंथी रुख को लेकर कई देशों में ग्राहकों की नाराजगी सामने आई, जिसे ‘कस्टमर रिवोल्ट’ तक कहा जा रहा है। दूसरी ओर चीन समेत वैश्विक बाजारों में BYD जैसी कंपनियां कम कीमत में बेहतर रेंज और फीचर्स वाले EV मॉडल पेश कर रही हैं, जिससे टेस्ला की पकड़ ढीली हुई है।
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि बिक्री में गिरावट के बावजूद टेस्ला के शेयरों ने 2025 में लगभग 18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। निवेशकों को कंपनी के भविष्य के बड़े दांवों पर भरोसा है, खासकर रोबो टैक्सी सर्विस और ह्यूमनॉइड रोबोट्स को लेकर किए जा रहे दावों पर। यही वजह है कि प्री-मार्केट ट्रेडिंग में भी टेस्ला के शेयरों में हल्की तेजी देखने को मिली।
वहीं BYD लगातार आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। ‘बिल्ड योर ड्रीम्स’ नाम से जानी जाने वाली यह कंपनी सिर्फ कार ही नहीं, बल्कि बैटरी टेक्नोलॉजी में भी बड़ा नाम बन चुकी है। दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट की कंपनी Berkshire Hathaway का इसमें निवेश होना BYD की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। किफायती दाम, लंबी रेंज और तेजी से बढ़ता मॉडल पोर्टफोलियो BYD को चीन के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में भी मजबूती दे रहा है।
भारत में भी BYD अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है। कंपनी ने हाल ही में अपनी लग्जरी इलेक्ट्रिक SUV सीलायन 7 की कीमतों में 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुकी है। हालांकि 31 दिसंबर 2025 तक बुकिंग कराने वाले ग्राहकों को पुरानी कीमत का फायदा मिला है। कुल मिलाकर साफ है कि EV रेस में अब मुकाबला और तेज हो गया है, और BYD की रफ्तार ने टेस्ला की बादशाहत को सीधी चुनौती दे दी है।