सेलेक्शन से ठीक पहले अर्शदीप सिंह का पंजा, विजय हजारे ट्रॉफी में कहर बरपाकर जीत के असली किंग बने

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न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए टीम इंडिया के ऐलान से ठीक पहले Arshdeep Singh ने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को मजबूर कर दिया कि वे उनकी अनदेखी न कर सकें। विजय हजारे ट्रॉफी में पंजाब की ओर से खेलते हुए अर्शदीप ने सिक्किम के खिलाफ ऐसा घातक स्पेल डाला, जिसने मुकाबले को एकतरफा बना दिया। यह मुकाबला सिर्फ एक जीत नहीं था, बल्कि अर्शदीप की वनडे टीम में मजबूत वापसी का ऐलान भी था।

पंजाब ने जैसे ही गेंदबाज़ी चुनी, अर्शदीप ने नई गेंद से विपक्ष पर हमला बोल दिया। शुरुआती ओवरों में ही उन्होंने सिक्किम के ओपनर अमित राजेरा को बेहतरीन गेंद पर पवेलियन भेज दिया। इसके बाद विकेटों की जो झड़ी लगी, उसने सिक्किम की पूरी बल्लेबाज़ी लाइनअप की रीढ़ तोड़ दी। महज दो ओवर के भीतर स्कोर 10 पर दो विकेट हो चुका था और यहीं से मैच की दिशा तय हो गई।

अर्शदीप ने अपने हर स्पेल में अलग अंदाज़ दिखाया। कहीं सटीक लाइन-लेंथ, कहीं हल्की स्विंग और कहीं रफ्तार में बदलाव। इसी मिश्रण के दम पर उन्होंने सिक्किम के कप्तान ली योंग लेपचा और पलज़ोर तमांग जैसे बल्लेबाज़ों को भी चलता किया। 9.3 ओवर में 26 रन देकर 5 विकेट लेना सिर्फ आंकड़ा नहीं था, यह एक संदेश था कि बड़े मैचों के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। उनकी इकॉनमी 2.74 रही और सिक्किम की पूरी टीम 75 रन पर सिमट गई।

यह अर्शदीप का लिस्ट-ए क्रिकेट में तीसरा पांच विकेट हॉल था। पहले ही टी20 इंटरनेशनल में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बन चुके अर्शदीप अब वनडे फॉर्मेट में भी अपनी उपयोगिता लगातार साबित कर रहे हैं। जसप्रीत बुमराह को आराम मिलने की संभावनाओं के बीच उनका यह प्रदर्शन चयनकर्ताओं के लिए बेहद अहम संकेत माना जा रहा है।

छोटे लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब की टीम ने भी किसी तरह की ढिलाई नहीं दिखाई। कप्तान प्रभसिमरन सिंह और हरनूर सिंह ने आक्रामक शुरुआत करते हुए महज 6.2 ओवर में बिना विकेट गंवाए लक्ष्य हासिल कर लिया। पंजाब की यह 10 विकेट की जीत जितनी बल्लेबाज़ी से आसान दिखी, उतनी ही गेंदबाज़ी में अर्शदीप सिंह की बदौलत घातक भी रही।

टीम इंडिया के सेलेक्शन के दिन अर्शदीप का यह प्रदर्शन सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं कहता, बल्कि यह बताता है कि बड़े मंच के लिए वह मानसिक और तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं। विजय हजारे ट्रॉफी के इस मुकाबले ने साफ कर दिया कि जब बात दबाव की होती है, तो अर्शदीप सिंह सच में “किंग” बनकर सामने आते हैं।

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