छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को शनिवार को बड़ी सफलता मिली है। एक ओर सुकमा और बीजापुर में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षाबलों ने कुल 14 नक्सलियों को मार गिराया, वहीं दूसरी ओर नक्सल संगठन को अंदर से तोड़ने वाली खबर सामने आई, जब स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर और मोस्ट वांटेड नक्सली देवा बारसे ने 20 साथियों के साथ हथियार डाल दिए। इस दोहरी कार्रवाई को बस्तर में नक्सलवाद के अंत की दिशा में अब तक का सबसे निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना पर डीआरजी की टीम को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया था। शनिवार सुबह करीब आठ बजे नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने 12 नक्सलियों को ढेर कर दिया। मुठभेड़ स्थल से सभी शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं और इलाके में सघन तलाशी अभियान अब भी जारी है। वहीं बीजापुर में तड़के करीब पांच बजे शुरू हुई मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए। पुलिस के मुताबिक, इनमें से एक एरिया कमेटी मेंबर था जिस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि दूसरा आठ लाख का इनामी नक्सली था। बीजापुर मुठभेड़ की पुष्टि खुद एसपी ने की है।
इसी बीच नक्सल नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा जब बटालियन नंबर-1 के कमांडर इन चीफ देवा बारसे ने हैदराबाद में सरेंडर कर दिया। देवा के साथ 20 अन्य नक्सलियों ने भी हथियार डाल दिए हैं। बताया जा रहा है कि देवा अपने साथियों के साथ तेलंगाना के मुलुगु पहुंचा था, जहां से पुलिस उसे हैदराबाद लेकर गई। शनिवार दोपहर पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस सरेंडर से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा करेगी।
देवा बारसे नक्सल संगठन के सबसे खतरनाक रणनीतिकारों में गिना जाता था। वह गुरिल्ला युद्ध में माहिर बटालियन नंबर-1 का प्रमुख था और कुख्यात नक्सली हिड़मा का सबसे करीबी माना जाता था। हिड़मा के सेंट्रल कमेटी मेंबर बनने के बाद उसी ने देवा को बटालियन की कमान सौंपी थी। देवा के सरेंडर के साथ ही नक्सलियों की सबसे घातक बटालियन का पूरी तरह से अंत माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि देवा से नक्सल नेटवर्क, ठिकानों, सप्लाई लाइनों, फंडिंग और रणनीति से जुड़ी बेहद अहम जानकारियां मिल सकती हैं। इससे न केवल नक्सल संगठन की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचेगा, बल्कि उनका मनोबल भी पूरी तरह टूटेगा। स्थानीय समर्थन पर भी इसका सीधा असर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि देवा बस्तर और नक्सल संगठन के बीच एक अहम कड़ी माना जाता था।
गौरतलब है कि इससे पहले 25 दिसंबर को ओडिशा के कंधमाल में हुई मुठभेड़ में एक करोड़ से ज्यादा के इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर गणेश उईके समेत छह नक्सली मारे गए थे। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों के बाद सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि बस्तर में अब केवल 200 से 300 सशस्त्र नक्सली ही बचे हैं, जो छोटे-छोटे समूहों में छिपे हुए हैं। महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह खत्म हो चुका है और उत्तर बस्तर व माड़ डिवीजन में भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो चुका है।
अब सुरक्षाबलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण बस्तर डिवीजन को पूरी तरह नक्सल मुक्त करना है। खुफिया जानकारी के मुताबिक, पापाराव अभी भी दक्षिण बस्तर के जंगलों में अलग-अलग टुकड़ियों के साथ छिपा हुआ है, जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में सक्रिय है। अगर आने वाले 90 दिनों में बचे हुए 5–6 बड़े नक्सली या तो मारे जाते हैं या सरेंडर करते हैं, तो बस्तर में नक्सल संगठन की रीढ़ पूरी तरह टूट जाएगी।
यह पूरी कार्रवाई न सिर्फ सुरक्षाबलों की रणनीतिक बढ़त को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि छत्तीसगढ़ में दशकों पुरा नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है।