बीते हफ्ते की कीमती धातुओं की चाल में साफ फर्क देखने को मिला। जहां सोने के भाव में गिरावट दर्ज हुई, वहीं चांदी ने जोरदार उछाल के साथ निवेशकों का ध्यान खींच लिया। 10 ग्राम सोना ₹3,174 टूटकर ₹1,34,782 पर आ गया, जबकि चांदी ₹6,443 बढ़कर ₹2,34,550 प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई।
सालाना तस्वीर देखें तो 2025 में दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड तोड़े हैं। पूरे साल में सोना करीब 75% महंगा हुआ, जबकि चांदी की तेजी और भी तेज रही—लगभग 167% की छलांग। 2024 के अंत में जहां सोना ₹76,162 प्रति 10 ग्राम था, वहीं 2025 के अंत तक यह ₹1.33 लाख से ऊपर निकल गया। चांदी भी ₹86,017 प्रति किलो से बढ़कर ₹2.30 लाख के पार पहुंची।
सोने में लंबी अवधि की तेजी के पीछे डॉलर की कमजोरी, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंकों की भारी खरीद जैसे कारण रहे। अमेरिका में ब्याज दरों में नरमी से डॉलर दबाव में आया, जिससे सोना सस्ता पड़ा और मांग बढ़ी। वहीं रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे जोखिमों ने सोने को सुरक्षित निवेश बनाए रखा। चीन समेत कई देशों के रिजर्व बैंकों की आक्रामक खरीद ने भी भावों को सहारा दिया।
चांदी की तेजी का आधार अलग है। सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ईवी सेक्टर में बढ़ती औद्योगिक मांग ने इसे केवल ज्वेलरी से आगे जरूरी कच्चा माल बना दिया। इसके साथ ही अमेरिका में टैरिफ को लेकर आशंकाओं ने कंपनियों को पहले से स्टॉक जमा करने पर मजबूर किया, जिससे सप्लाई टाइट हुई और दाम चढ़े। मैन्युफैक्चरर्स की अग्रिम खरीद ने भी तेजी को और बल दिया।
आगे की राह पर नजर डालें तो जानकार मानते हैं कि चांदी की मांग मजबूत बनी रह सकती है और भाव ₹2.75 लाख प्रति किलो तक जा सकते हैं। सोने में भी निवेशकों की दिलचस्पी कायम है और साल के अंत तक ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छूने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर, बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमती धातुओं का दीर्घकालिक आकर्षण बरकरार दिखता है।