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CGPSC घोटाला: 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट से खुली परतें, कोचिंग संचालक ने बारनवापारा में कराई थी ‘टारगेटेड तैयारी’, एग्जाम से पहले पहुंच गया था पेपर

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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2021 भर्ती प्रक्रिया से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। Central Bureau of Investigation ने स्पेशल कोर्ट में करीब 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें इस हाई-प्रोफाइल साजिश के कुल 29 आरोपियों को नामजद किया गया है। चार्जशीट में पहली बार एक कोचिंग संचालक की भूमिका को भी केंद्रीय कड़ी बताया गया है, जिसने महासमुंद जिले के बारनवापारा इलाके के एक होटल में संदिग्ध अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ‘टारगेटेड तैयारी’ कराई। CBI का दावा है कि इस संचालक के पास CGPSC 2021 का प्रश्नपत्र पहले ही पहुंच चुका था और उसी आधार पर चयन की पटकथा लिखी गई।

इससे पहले एजेंसी 13 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी थी। फिलहाल 12 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि उत्कर्ष चंद्राकर फरार बताया गया है, जिसकी भूमिका परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी कराने की अहम कड़ी मानी जा रही है। जेल में बंद आरोपियों में तत्कालीन CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल (PSC चयनित), बहू भूमिका कटियार और साहिल सोनवानी सहित अन्य नाम शामिल हैं।

चार्जशीट के अनुसार, प्रभावशाली कारोबारी परिवारों को लाभ पहुंचाने का पूरा नेटवर्क सक्रिय था। उद्योगपति श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका का डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयन इसी साजिश का परिणाम बताया गया है। इसी तरह अन्य प्रभावशाली परिवारों के रिश्तेदारों के चयन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। CBI की जांच में यह तथ्य सामने आया कि CGPSC 2021 के टॉप-20 चयनित अभ्यर्थियों में 13 से अधिक किसी न किसी अधिकारी, नेता या प्रभावशाली कारोबारी के बेटे-बहू या करीबी रिश्तेदार थे। इसी आधार पर चयन सूची को चुनौती दी गई और मामला जांच के लिए CBI को सौंपा गया।

एजेंसी ने चार्जशीट में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक की भूमिका को निर्णायक बताया है। दावा है कि प्रश्नपत्र लीक से लेकर चयन प्रक्रिया तक आंतरिक मिलीभगत के ठोस साक्ष्य मिले हैं। जांच के मुताबिक, टामन ने प्रश्नपत्र अपने घर पर साहिल, नीतेश, निशा कोसले और दीपा आडिल को उपलब्ध कराए। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर उद्योगपति श्रवण गोयल तक पहुंचाया, जिसके आधार पर उनके बेटे और बहू ने तैयारी की और चयनित हुए।

साजिश की जड़ें कोलकाता से रायपुर तक फैली बताई गई हैं। प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को सौंपा गया था। जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास सात सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर पहुंचा और उन्हें आरती वासनिक को सौंपा। आरोप है कि वासनिक ने पर्चे घर ले जाकर टामन और ललित के साथ उनकी कॉपी की, फिर उन्हें दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए वापस भेज दिया गया।

यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्तियों से जुड़ा है, जहां आरोप है कि पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों को लाभ पहुंचाया गया। योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर करीबी लोगों को बैठाने की साजिश रची गई। 171 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में प्री, मेंस और इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी हुई थी—अब उसी प्रक्रिया पर कानून की कसौटी तय करेगी कि दोषी कौन और साजिश कितनी गहरी थी। फाइनल चार्जशीट के बाद ट्रायल शुरू होने की संभावना है, जिससे इस घोटाले पर न्यायिक मुहर लगने की दिशा साफ होती दिख रही है।

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