“मानवीय संवेदना की मिसाल : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा केन्द्रीय जेल की महिला बंदी एवं नवजात शिशु हेतु सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित”

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दुर्ग, 03 जनवरी 2026/ राज्य विधिक सेवा प्रााधिकरण बिलासपुर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन केन्द्रीय जेल दुर्ग के महिला प्रकोष्ठ में हत्या के अपराध में निरुद्ध एक महिला बंदी के गर्भवती होने की सूचना प्राप्त होते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित रूप से आवश्यक कदम उठाए गए। प्राधिकरण ने प्रारंभिक अवस्था से ही महिला बंदी के स्वास्थ्य, गरिमा एवं मातृत्व अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
प्राधिकरण की सतत निगरानी में महिला बंदी का नियमित चिकित्सकीय परीक्षण सुनिश्चित किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों से समय-समय पर परामर्श, आवश्यक जांच, दवाइयों की उपलब्धता तथा गर्भावस्था के अनुरूप विशेष देखभाल की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही महिला बंदी को पौष्टिक एवं संतुलित आहार उपलब्ध कराए जाने हेतु जेल प्रशासन से समन्वय स्थापित किया गया, जिससे गर्भस्थ शिशु एवं माता दोनों का समुचित पोषण सुनिश्चित हो सके। पूरी गर्भावस्था अवधि के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा महिला बंदी को मानसिक संबल प्रदान किया गया तथा उसे यह विश्वास दिलाया गया कि कानून एवं व्यवस्था के भीतर रहते हुए उसके स्वास्थ्य और मातृत्व का पूर्ण संरक्षण किया जाएगा। यह निरंतर प्रयास एक सकारात्मक परिणाम के रूप में सामने आया। प्राधिकरण के अथक प्रयासों, जेल प्रशासन के सहयोग तथा चिकित्सकीय टीम की सतर्कता के फलस्वरूप दिनांक 31/12/2025 को महिला बंदी द्वारा एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया गया। प्रसव सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ तथा प्रसवोपरांत माता एवं नवजात शिशु-दोनों पूर्णतः स्वस्थ पाए गए। यह घटना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग की मानवीय सोच, संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता एवं बंदियों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सशक्त उदाहरण है। यह सक्सेस स्टोरी दर्शाती है कि अपराध की गंभीरता से परे, प्रत्येक व्यक्ति-विशेषकर गर्भवती महिला-को स्वास्थ्य, गरिमा और मातृत्व का अधिकार सुनिश्चित किया जाना विधिक सेवा प्राधिकरण का मूल दायित्व है।

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