भारत में चाय सिर्फ आदत नहीं, बल्कि दिनचर्या का अहम हिस्सा है। सुबह की शुरुआत हो या शाम की बातचीत, चाय हर मौके की साथी बनती है। लेकिन अगर रोज़ाना पी जाने वाली चायपत्ती में मिलावट हो, तो इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है। आजकल सस्ती चाय के नाम पर बाजार में रंग लगी पत्तियां, बुरादा या पहले से इस्तेमाल की गई चायपत्ती तक बेची जा रही है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है। राहत की बात यह है कि चायपत्ती की शुद्धता जांचने के लिए किसी लैब या मशीन की जरूरत नहीं, कुछ बेहद आसान घरेलू तरीकों से आप खुद सच्चाई जान सकते हैं।
सबसे आसान तरीका ठंडे पानी से जुड़ा है। एक गिलास ठंडे पानी में चायपत्ती की एक चुटकी डालते ही अगर पानी तुरंत गहरा रंग छोड़ने लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया है। असली चायपत्ती रंग धीरे-धीरे छोड़ती है और पानी को अचानक काला नहीं बनाती। इसी तरह हथेली पर चायपत्ती को हल्के से रगड़कर भी सच्चाई सामने आ जाती है। अगर हथेली पर काले या भूरे रंग के निशान रह जाएं, तो यह मिलावट की ओर इशारा करता है, क्योंकि शुद्ध चायपत्ती रगड़ने पर ज्यादा रंग नहीं छोड़ती।
चायपत्ती को उबालकर भी उसकी गुणवत्ता समझी जा सकती है। बिना दूध और चीनी डाले जब चायपत्ती उबालने पर जरूरत से ज्यादा झाग बने या पानी असामान्य रूप से बहुत गहरा हो जाए, तो यह खराब क्वालिटी या मिलावट का संकेत हो सकता है। अच्छी चायपत्ती उबलने पर साफ रंग और प्राकृतिक खुशबू देती है। कई बार मिलावट के लिए पहले से इस्तेमाल की गई चायपत्ती को सुखाकर दोबारा मिला दिया जाता है। ऐसी चायपत्ती चाय बनाते ही जल्दी रंग छोड़ देती है और उसमें ताजगी या खुशबू नहीं रहती।
एक और आसान तरीका है सफेद कागज पर चायपत्ती फैलाकर ध्यान से देखना। अगर उसमें लकड़ी का बुरादा, धूल, या अलग-अलग रंग के कण नजर आएं, तो समझ लें कि चायपत्ती शुद्ध नहीं है। अच्छी गुणवत्ता वाली चायपत्ती के दाने एक जैसे, साफ और बिना बाहरी कणों के होते हैं।
अगर रोज़ की चाय से स्वाद के साथ सेहत भी बचानी है, तो इन छोटे-छोटे तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सतर्कता आपको मिलावटी चाय से होने वाले नुकसान से बचा सकती है और आपकी हर चुस्की को सुरक्षित बना सकती है।