शिक्षा की गुणवत्ता को ज़मीन पर बेहतर बनाने की दिशा में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक अहम पहल शुरू की है। इसके तहत सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के चुने गए प्राचार्यों को 22 से 30 जनवरी के बीच देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में जाकर कौशल, नेतृत्व और अनुभव आधारित शिक्षण का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। यह एक्सपोज़र दौरा स्कूल नेतृत्व को बदलते शैक्षणिक परिदृश्य से जोड़ने और कक्षा से बाहर की वास्तविक सीख को समझने का अवसर देगा।
सीबीएसई का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जिसमें कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की पढ़ाई से जोड़ने पर जोर दिया गया है। बोर्ड पिछले दो वर्षों से प्राचार्यों के लिए एक्सपोज़र विजिट योजना चला रहा है, ताकि वे देश की बेहतरीन शैक्षणिक प्रथाओं को करीब से देख सकें और उन्हें अपने स्कूलों में प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। इसी क्रम में इस बार देशभर से पाँच संस्थानों का चयन किया गया है, जहां प्राचार्यों को आधुनिक शिक्षण मॉडल, उद्योग–अकादमिक समन्वय और नेतृत्व कौशल की गहरी समझ मिलेगी।
चयनित संस्थानों में मुंबई की एटलस स्किल टेक यूनिवर्सिटी, पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, असम स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, झारखंड का बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और पश्चिम बंगाल का फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट शामिल हैं। इन संस्थानों में प्राचार्य बेस्ट प्रैक्टिस, इंटरैक्टिव शिक्षण पद्धतियों और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के वास्तविक क्रियान्वयन को समझेंगे।
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि इस एक्सपोज़र विजिट के लिए वही प्राचार्य आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने पहले कभी इस तरह के दौरे में हिस्सा नहीं लिया हो। भागीदारी के लिए ईमेल के माध्यम से पुष्टि अनिवार्य होगी। बोर्ड का मानना है कि जब स्कूल नेतृत्व खुद अनुभव आधारित शिक्षा को समझेगा, तभी उसे स्कूल स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
कौशल शिक्षा को मजबूत करने के लिए सीबीएसई की ‘कौशल बोध’ पाठ्यपुस्तकें प्रिंट और डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध हैं, जिन्हें एनसीईआरटी और सीबीएसई की एकेडमिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। बोर्ड पहले ही यह दिशा-निर्देश दे चुका है कि कौशल शिक्षा लागू करने के बाद स्कूलों को वर्ष के अंत में ‘कौशल मेला’ आयोजित करना चाहिए, ताकि छात्र-छात्राएं अपने सीखे हुए कौशल को प्रोजेक्ट्स के माध्यम से प्रस्तुत कर सकें। कुल मिलाकर, यह पहल प्राचार्यों के माध्यम से स्कूलों में व्यावहारिक, रोजगारोन्मुख और आधुनिक शिक्षा को नई रफ्तार देने की कोशिश है।