प्रधानमंत्री Narendra Modi ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत वैश्विक खेल मंच पर बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तैयारी में है। वाराणसी में रविवार से शुरू हुई 72वीं सीनियर राष्ट्रीय वालीबॉल चैंपियनशिप के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह सिर्फ एक आयोजन की तैयारी नहीं, बल्कि देश में खेल संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दीर्घकालिक सोच का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि बीते साढ़े ग्यारह वर्षों में भारत ने खेलों के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखे हैं। सरकार के प्रयासों से देश ने 20 से अधिक बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं, जिनमें फीफा अंडर-17 विश्व कप और हॉकी विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित आयोजन शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 2030 के राष्ट्रमंडल खेल भारत में आयोजित होने जा रहे हैं और इसी क्रम में 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी एक स्वाभाविक अगला कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि देश आज ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार है, जहां विकास की हर परिभाषा बदलाव से जुड़ी है। खेलों का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम और खेलो भारत नीति 2025 जैसे सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही अवसर मिलेंगे, खेल संगठनों में पारदर्शिता बढ़ेगी और युवाओं को खेल व शिक्षा दोनों में एक साथ आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। सरकार एक ओर मजबूत बुनियादी ढांचा और वित्तीय समर्थन तैयार कर रही है, तो दूसरी ओर खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय अनुभव देने पर भी जोर दे रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि एक समय था जब खेलों को करियर के रूप में अपनाने को लेकर समाज और सरकार, दोनों में उदासीनता थी। बहुत कम युवा खेल को भविष्य के रूप में देखते थे। लेकिन पिछले दशक में यह सोच तेजी से बदली है। आज सरकार, समाज और युवा—तीनों मिलकर खेलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती पहचान के रूप में दिख रहा है।
उन्होंने कहा कि देश की यह प्रगति ‘इंडिया फर्स्ट’ की सामूहिक भावना का नतीजा है। स्वच्छता से लेकर डिजिटल पेमेंट तक और पर्यावरण अभियानों से लेकर विकसित भारत के लक्ष्य तक, हर क्षेत्र में यही भावना भारत को आगे बढ़ा रही है। खेलों में हो रहा बदलाव भी उसी राष्ट्रीय चेतना का प्रतिबिंब है, जो आने वाले वर्षों में भारत को ओलंपिक जैसे वैश्विक आयोजनों की मेजबानी के लिए पूरी तरह सक्षम बनाएगा।