नशे पर निर्णायक प्रहार: बस्तर पुलिस की सख्ती से 15 करोड़ से ज्यादा के नशीले पदार्थ जब्त, 216 तस्कर सलाखों के पीछे

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छत्तीसगढ़ के Jagdalpur से नशे के खिलाफ बड़ी और साफ संदेश देने वाली कार्रवाई सामने आई है। वर्ष 2025 में Bastar Police ने एनडीपीएस एक्ट के तहत नशे के कारोबार पर करारा वार करते हुए 15 करोड़ 44 लाख रुपये से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। इस अभियान में कुल 222 प्रकरण दर्ज किए गए और 2,727 किलो गांजा के साथ 216 तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

बस्तर आईजी Sundar Raj P ने बताया कि पूरे संभाग के सभी जिलों में नारकोटिक्स नेटवर्क को तोड़ने के लिए सुनियोजित और निरंतर कार्रवाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि नशे की सबसे बड़ी सप्लाई लाइन पड़ोसी राज्य Odisha से संचालित हो रही थी, जिस पर फोकस्ड इंटेलिजेंस और इंटर-स्टेट समन्वय के जरिए लगाम कसी गई।

खास बात यह रही कि तस्कर केवल गांजा ही नहीं, बल्कि गांजा तेल और हशीश जैसे महंगे नशीले पदार्थों की तस्करी भी कर रहे थे, जिनकी कीमत करोड़ों में आंकी जाती है। बस्तर पुलिस ने वर्ष 2025 में इन नेटवर्क्स की कमर तोड़ते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि नशे के कारोबार के लिए संभाग में अब कोई जगह नहीं है। आईजी ने यह भी कहा कि 2026 में भी सभी जिलों को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी तरह की अवैध तस्करी की कोशिश को शुरुआत में ही कुचल दिया जाए।

नशा कारोबारियों पर आर्थिक शिकंजा कसने की दिशा में भी बड़ी कार्रवाई हुई। 22 दिसंबर को खरोरा में सफेमा के तहत गांजा तस्कर राकेश वर्मा की करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति जब्त की गई। आरोपी के नाम पर दर्ज 13 प्लॉट—करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य—को जब्त किया गया। इसी कड़ी में खरोरा थाना के अपराध क्रमांक 308/25 (धारा 20बी, नारकोटिक एक्ट) के तहत 20 दिसंबर को छडिया गांव से मोहन सिंह कोशले को गिरफ्तार किया गया, जिसके कब्जे से 27.894 किलो गांजा बरामद हुआ। पूछताछ में उसने इस खेप को राकेश वर्मा से जुड़ा बताया, जो घटना के बाद से फरार है।

इस मामले में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को जब्त करने के लिए प्रतिवेदन SAFEMA Court Mumbai भेजा गया था। कोर्ट के आदेश पर राकेश वर्मा और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज ग्राम खपरीडीहखुर्द, खरोरा स्थित अलग-अलग स्थानों की 13 अचल संपत्तियों को जप्त किया गया।

कुल मिलाकर, बस्तर पुलिस की यह कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि तस्करों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने तक पहुंची। संदेश साफ है—नशे का कारोबार करेंगे तो जेल भी होगी और अवैध कमाई भी जब्त होगी।

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