Report: दिखती मजबूती के पीछे फंसी भारतीय अर्थव्यवस्था, ‘गोल्डीलॉक्स’ से पॉलिसी ग्रिडलॉक की ओर इशारा

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ऊपर से देखने पर भारतीय अर्थव्यवस्था आज भी मजबूत, संतुलित और स्थिर नजर आती है, लेकिन अंदरखाने तस्वीर उतनी सहज नहीं है। Systematix Research की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस ‘गोल्डीलॉक्स’ इकोनॉमी को भारत की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा था, उसमें अब दबाव के साफ संकेत उभरने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर कर संग्रह और लगातार सिमटता राजकोषीय दायरा सरकार को एक तरह की नीतिगत उलझन यानी पॉलिसी ग्रिडलॉक की स्थिति में ले जा रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा आर्थिक हालात में विकास दर भले ही कागजों पर मजबूत दिख रही हो, लेकिन यह मजबूती कई अंदरूनी कमजोरियों को ढकने का काम कर रही है। टैक्स कलेक्शन की रफ्तार अपेक्षा से कम रहने और खर्च के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश घटने से सरकार के सामने विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। नतीजतन, बड़े और निर्णायक नीतिगत फैसले लेने में देरी हो रही है या वे आधे-अधूरे रूप में सामने आ रहे हैं।

‘गोल्डीलॉक्स’ अर्थव्यवस्था का मतलब होता है ऐसा संतुलन, जहां न तो महंगाई बहुत तेज हो और न ही विकास बहुत धीमा पड़े। भारत को लंबे समय से इसी श्रेणी में रखा जाता रहा है। लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर राजकोषीय दबाव ऐसे ही बढ़ते रहे, तो यही संतुलन धीरे-धीरे टूट सकता है। पॉलिसी ग्रिडलॉक की स्थिति में अर्थव्यवस्था बाहर से स्थिर लगती है, मगर भीतर फैसले अटक जाते हैं और नीतियां अपेक्षित असर नहीं दिखा पातीं।

सिस्टमैटिक रिसर्च का मानना है कि आने वाले समय में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती विकास को बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन और नीतिगत स्पष्टता के बीच संतुलन साधने की होगी। अगर कर संग्रह में सुधार और खर्च की प्राथमिकताओं को लेकर ठोस दिशा नहीं बनी, तो मौजूदा ‘ठीक-ठाक’ दिखने वाली तस्वीर के पीछे छिपी कमजोरियां और गहरी हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां मजबूत आंकड़ों के भरोसे आगे बढ़ना जोखिम भरा साबित हो सकता है। असली परीक्षा अब नीतिगत फैसलों की गति, स्पष्टता और साहस की होगी, क्योंकि यही तय करेगा कि भारत गोल्डीलॉक्स संतुलन में बना रहेगा या पॉलिसी ग्रिडलॉक के जाल में और गहराई से फंसता चला जाएगा।

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