अक्सर लोगों को लगता है कि ChatGPT हर सवाल का सही, सटीक और समझदारी भरा जवाब दे सकता है। जो भी पूछो, तुरंत जवाब मिल जाता है—यही वजह है कि इसे सर्वज्ञानी मान लिया गया है। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। खुद OpenAI यह स्वीकार करता है कि यह टूल गलतियां कर सकता है और हर स्थिति में भरोसेमंद नहीं है। भले ही 2022 के बाद इसमें कई बड़े अपडेट हुए हों और इसकी क्षमता पहले से कहीं बेहतर हो गई हो, फिर भी आज भी कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके सामने ChatGPT साफ तौर पर फेल हो जाता है।
सबसे पहले बात उन वर्जित विषयों की, जिन पर ChatGPT कभी सीधा जवाब नहीं देगा। हथियार बनाने के तरीके, धोखाधड़ी, हैकिंग या किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़े सवालों पर यह सिर्फ सतही या ऐतिहासिक जानकारी तक सीमित रहता है। “कैसे करें” वाले जवाब देने से यह इनकार कर देता है। यही स्थिति यौन सामग्री से जुड़े सवालों में भी देखने को मिलती है। कानून, सहमति और सामाजिक संदर्भ की बात तो करेगा, लेकिन अश्लील कंटेंट या स्पष्ट विवरण नहीं देगा।
दूसरा बड़ा पेंच तब आता है, जब बात बदली हुई पहेलियों की होती है। इंटरनेट पर पहले से मौजूद किसी पहेली को ChatGPT आसानी से हल कर लेता है, लेकिन जैसे ही उसी पहेली में थोड़ा सा नया मोड़ या बदलाव जोड़ दिया जाए, वह उलझने लगता है। इससे यह साफ होता है कि ChatGPT वास्तव में इंसानों की तरह सोचता नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद पैटर्न और डेटा के आधार पर जवाब मिलाने की कोशिश करता है।
तीसरी कमजोरी गलत जानकारी पर आधारित सवालों में सामने आती है। अगर सवाल ही किसी गलत तथ्य पर टिका हो, तो ChatGPT कई बार उसे सुधारने के बजाय उसी गलत आधार पर पूरा जवाब गढ़ देता है। मसलन, किसी ऐसी फिल्म के सीन के बारे में पूछ लेना जो कभी था ही नहीं, या किसी कहानी में मौजूद से ज्यादा किरदार गिनवा देना—इन हालात में भी वह आत्मविश्वास से कहानी सुना देगा। क्योंकि उसका मकसद अक्सर सही करना नहीं, बल्कि बातचीत को आगे बढ़ाना होता है।
चौथा और सबसे दिलचस्प पहलू तब सामने आता है, जब आप उससे उसकी गलती का कारण पूछते हैं। ChatGPT माफी तो मांग लेता है, तकनीकी शब्दों में बात भी कर देता है, लेकिन असली वजह कभी नहीं बता पाता। इसकी वजह यह है कि उसमें आत्म-जागरूकता नहीं होती। उसे खुद नहीं पता कि उसने गलती क्यों की, वह सिर्फ ऐसा जवाब देता है जो सुनने में तार्किक लगे।
निष्कर्ष साफ है—ChatGPT एक बेहद उपयोगी टूल जरूर है, लेकिन यह इंसान नहीं है और न ही कोई सर्वज्ञानी दिमाग। यह समझ से ज्यादा पैटर्न और संभावनाओं पर काम करता है। इसलिए इसके हर जवाब को अंतिम सच मान लेना समझदारी नहीं होगी, खासकर जब बात मेडिकल, कानूनी या फाइनेंशियल फैसलों की हो। ऐसे मामलों में खुद जांच और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है। याद रखना चाहिए कि इसके पीछे सोचने वाला दिमाग नहीं, बल्कि गणित और डेटा का खेल काम करता है।