भारतीय क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह मैदान नहीं बल्कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा यानी SIR के तहत शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ को नोटिस भेजते हुए सुनवाई के लिए तलब किया है। यह प्रक्रिया 16 दिसंबर 2025 से पश्चिम बंगाल में चल रही है और इसी क्रम में दोनों के नाम जांच सूची में शामिल हुए।
दरअसल, शमी और उनके भाई के एनुमरेशन फॉर्म में कुछ तकनीकी खामियां पाई गई हैं। ये गड़बड़ियां ‘प्रोजेनी मैपिंग’ और ‘सेल्फ मैपिंग’ से जुड़ी बताई जा रही हैं। इसी आधार पर कोलकाता के जादवपुर इलाके स्थित कार्तुजु नगर स्कूल से उन्हें सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी के सामने पेश होने का नोटिस जारी किया गया था।
हालांकि, शमी ने फिलहाल सुनवाई में शामिल होने में असमर्थता जताई है। इस समय वह राजकोट में विजय हजारे ट्रॉफी खेल रहे हैं और बंगाल टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट की व्यस्तताओं का हवाला देते हुए शमी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बताया कि 5 जनवरी 2026 को तय सुनवाई में उनकी उपस्थिति संभव नहीं है। उनके अनुरोध के बाद सुनवाई की तारीख 9 से 11 जनवरी के बीच के लिए टाल दी गई है।
मोहम्मद शमी कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 93 के पंजीकृत मतदाता हैं, जो रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र में आता है। भले ही उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ हो, लेकिन वह कई वर्षों से कोलकाता में स्थायी रूप से रह रहे हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला तकनीकी जांच से जुड़ा है और इसमें किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं है।
यह प्रकरण ऐसे वक्त सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया पर सियासी बहस तेज हो चुकी है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 3 जनवरी 2026 को उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट संशोधन से जुड़े अहम निर्देश अनौपचारिक रूप से व्हाट्सऐप और मैसेज के जरिए दिए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं।
ममता बनर्जी का कहना है कि बिना लिखित आदेश या वैधानिक दस्तावेजों के इस तरह की प्रक्रिया कई असली मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में शमी से जुड़ा यह मामला अब केवल एक तकनीकी जांच नहीं रह गया है, बल्कि बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े राजनीतिक-प्रशासनिक विवाद का भी हिस्सा बन गया है।