देश की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर में प्रवेश करने जा रही है। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू होने वाला है, जो छह दशक से अधिक पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। इस बड़े बदलाव से पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने आयकर विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब किसी भी स्तर पर ढिलाई की गुंजाइश नहीं है।
नए साल के मौके पर विभाग के कर्मचारियों को भेजे गए अपने पारंपरिक संदेश में रवि अग्रवाल ने कहा कि आयकर अधिनियम 2025 के लागू होने के साथ 2026 विभाग के लिए बेहद निर्णायक वर्ष होगा। उन्होंने साफ किया कि नया कानून सिर्फ धाराओं का बदलाव नहीं है, बल्कि सोच, प्रक्रिया और काम करने के तरीके में भी बड़ा परिवर्तन लेकर आ रहा है। इसी वजह से नियम, प्रक्रियाएं और फॉर्म नए सिरे से तैयार किए जा रहे हैं और अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग व क्षमता निर्माण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
CBDT प्रमुख ने चेताया कि आने वाले महीने सबसे अहम हैं। इस दौरान अधिकारियों को नए कानून की भावना, संरचना और उद्देश्य को गहराई से समझना होगा, ताकि करदाताओं को सही, साफ और भरोसेमंद जानकारी दी जा सके। उन्होंने कहा कि यह बदलाव तभी सफल होगा, जब विभाग का हर कर्मचारी इसमें सक्रिय भागीदारी दिखाए और सीखने की जिज्ञासा बनाए रखे।
रवि अग्रवाल ने यह भी साफ किया कि अब कर प्रशासन का फोकस केवल टैक्स वसूली या दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकता। नई व्यवस्था में विभाग की भूमिका सुविधा, भरोसे और सेवा-आधारित प्रशासन की होगी। तकनीक को इस बदलाव की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि सिस्टम को नए ढांचे के अनुरूप ढाला जा रहा है और आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं की समझ बेहद जरूरी होगी।
खास तौर पर युवा अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में वही विभाग की कमान संभालेंगे, इसलिए उन्हें डेटा, टेक्नोलॉजी और नए टैक्स इकोसिस्टम के साथ खुद को लगातार अपडेट रखना होगा। 2025 की समीक्षा करते हुए अग्रवाल ने बताया कि विभाग ने शिकायतों के निपटारे, आदेशों की गुणवत्ता और लंबित अपीलों पर कड़ी नजर रखी। समयसीमा चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन अधिकारियों ने जिम्मेदारी और धैर्य के साथ काम किया।
बदलते कारोबारी माहौल और नए तरह के लेनदेन से पैदा हो रही वित्तीय जटिलताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब सीखना कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। उन्होंने NUDGE फ्रेमवर्क का हवाला देते हुए बताया कि डेटा के सही और जिम्मेदार इस्तेमाल से स्वैच्छिक टैक्स अनुपालन को बढ़ावा दिया जाएगा।
अपने संदेश के अंत में रवि अग्रवाल ने दो टूक कहा कि कर प्रशासन की विश्वसनीयता छोटे-बड़े फैसलों से बनती है। 2026 में विभाग को स्पष्टता, ईमानदारी और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना होगा, ताकि नया आयकर कानून सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी असरदार साबित हो सके।