अडाणी का पब्लिक बॉन्ड इश्यू ओपन: FD से ज्यादा रिटर्न का मौका, लेकिन निवेश से पहले ये सच जानना ज़रूरी

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अगर आप बैंक FD से थोड़ा आगे सोच रहे हैं और सुरक्षित रहते हुए बेहतर रिटर्न चाहते हैं, तो अडाणी ग्रुप का नया पब्लिक बॉन्ड इश्यू आपकी नज़र में आ सकता है। अडाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी Adani Enterprises Limited ने अपना तीसरा पब्लिक NCD इश्यू आज 6 जनवरी से निवेश के लिए खोल दिया है। इसमें 19 जनवरी तक आवेदन किया जा सकता है, हालांकि यह इश्यू पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर है, इसलिए तय तारीख से पहले भी बंद हो सकता है।

इस इश्यू में निवेशकों को 8.90 प्रतिशत तक सालाना ब्याज का ऑफर दिया जा रहा है, जो मौजूदा बैंक FD रेट्स से साफ तौर पर ज्यादा है। खास बात यह है कि कुल इश्यू का 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है, यानी आम निवेशकों को इसमें अच्छी हिस्सेदारी मिलने की संभावना है। इससे पहले 2024 और 2025 में आए अडाणी के बॉन्ड इश्यू को भी निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था।

निवेश की बात करें तो इसमें न्यूनतम 10,000 रुपये लगाने होंगे और उसके बाद 1,000 रुपये के मल्टीपल में निवेश बढ़ाया जा सकता है। कंपनी ने 2 साल, 3 साल और 5 साल के टेन्योर के विकल्प दिए हैं, ताकि निवेशक अपनी जरूरत और प्लानिंग के हिसाब से अवधि चुन सकें। ब्याज भुगतान के लिए तिमाही, सालाना और मैच्योरिटी पर एक साथ भुगतान जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, इस ब्याज को आपकी सालाना आय में जोड़ा जाएगा और टैक्स आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार लगेगा।

इन बॉन्ड्स में निवेश करना शेयर खरीदने जितना ही आसान है। इसके लिए आपके पास एक एक्टिव डीमैट अकाउंट होना चाहिए। जीरोधा, अपस्टॉक्स जैसे ब्रोकरेज ऐप्स के NCD या Bonds सेक्शन में जाकर सीधे आवेदन किया जा सकता है। इस इश्यू का बेस साइज 500 करोड़ रुपये का है, लेकिन ज्यादा मांग होने पर ग्रीन शू ऑप्शन के तहत इसे 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

अगर फायदे देखें तो सबसे बड़ा आकर्षण इसका रिटर्न है। जहां बड़े सरकारी बैंक 5 साल की FD पर करीब 7 से 7.5 प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं, वहीं यहां 8.90 प्रतिशत तक का मौका मिल रहा है। इसके अलावा CARE और ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियों ने इस इश्यू को AA- रेटिंग दी है, जो यह संकेत देती है कि कंपनी की ब्याज चुकाने की क्षमता मजबूत मानी जा रही है। ये बॉन्ड सिक्योर्ड हैं, यानी किसी भी खराब स्थिति में कंपनी की संपत्तियों के जरिए पहले बॉन्ड होल्डर्स का भुगतान किया जाएगा।

लेकिन हर निवेश की तरह इसमें भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। अगर भविष्य में कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति बिगड़ती है और रेटिंग डाउनग्रेड होती है, तो बॉन्ड की मार्केट वैल्यू पर असर पड़ सकता है। हालांकि ये बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे, लेकिन मैच्योरिटी से पहले इन्हें बेचना हमेशा आसान नहीं होता, क्योंकि लिक्विडिटी सीमित हो सकती है। साथ ही अडाणी ग्रुप से जुड़े किसी भी बड़े बाहरी विवाद का असर बॉन्ड की कीमतों पर भी दिख सकता है।

कंपनी ने साफ किया है कि इस इश्यू से जुटाई गई रकम का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा मौजूदा कर्ज चुकाने या उसकी प्री-पेमेंट में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि बाकी पैसा सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए रखा जाएगा। जुलाई 2025 में आया पिछला NCD इश्यू महज 3 घंटे में फुल सब्सक्राइब हो गया था, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स की मानें तो किसी एक कंपनी या ग्रुप में पूरा पैसा झोंकना समझदारी नहीं है। बेहतर यही है कि अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही ऐसे कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में लगाया जाए, ताकि रिटर्न और रिस्क के बीच संतुलन बना रहे।

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