स्कूल शिक्षा में रचनात्मकता को नई दिशा देने के लिए Central Board of Secondary Education ने पांचवीं से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए ‘बडिंग ऑथर प्रोग्राम’ की शुरुआत की है। इस पहल का मकसद बच्चों में कहानी लेखन की आदत विकसित करना, उनकी कल्पनाशक्ति को विस्तार देना और आत्म-अभिव्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाना है। सीबीएसई का मानना है कि लेखन केवल भाषा का अभ्यास नहीं, बल्कि सोचने, समझने और अपने विचारों को सशक्त ढंग से सामने रखने का जरिया है।
यह कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण स्कूल स्तर पर 6 जनवरी से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलेगा, जिसमें छात्रों को कहानियां लिखने और उन्हें बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इस दौर में स्कूल अपने स्तर पर गतिविधियां आयोजित करेंगे और बच्चों को मार्गदर्शन देंगे, ताकि वे अपनी रचनात्मक सोच को शब्दों में ढाल सकें। इसके बाद दूसरा चरण 3 फरवरी से 27 फरवरी तक चलेगा, जिसमें चुनी गई कहानियों को सीबीएसई पोर्टल पर पंजीकरण के साथ जमा कराया जाएगा।
सीबीएसई के अनुसार यह प्रोग्राम छात्रों को लेखन के जरिए क्रिटिकल थिंकिंग, भाषा दक्षता और आत्म-अभिव्यक्ति विकसित करने का मंच देता है। छात्र अपनी खुद की मौलिक और अप्रकाशित लघु कहानियां हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकते हैं। खास बात यह है कि इस प्रोग्राम में भाग लेने के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे हर पृष्ठभूमि के छात्र इसमें आसानी से शामिल हो सकें।
कार्यक्रम को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में पांचवीं और छठी कक्षा के छात्र, दूसरी में सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्र, जबकि तीसरी श्रेणी में नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्र शामिल होंगे। हर श्रेणी के लिए शब्द सीमा भी तय की गई है, ताकि उम्र और स्तर के हिसाब से लेखन को संतुलित रखा जा सके। पहले चरण में प्रति कक्षा प्रतिभागियों की संख्या पर कोई सीमा नहीं रखी गई है, यानी ज्यादा से ज्यादा बच्चों को लिखने का मौका मिलेगा।
स्कूल स्तर पर पहले दौर के बाद हर स्कूल कुल 12 सर्वश्रेष्ठ कहानियों को शॉर्टलिस्ट करेगा, जिसमें हर कक्षा से दो कहानियां चुनी जाएंगी। इन्हीं चुनी गई रचनाओं को दूसरे चरण में सीबीएसई पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। कार्यक्रम की खास बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर चयनित बेहतरीन कहानियों को सीबीएसई द्वारा लघु कथाओं के संग्रह के रूप में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे छात्रों को कम उम्र में ही ‘प्रकाशित लेखक’ बनने का अनुभव मिल सकेगा।
दूसरे चरण में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को सीबीएसई की ओर से ऑनलाइन प्रतिभागी प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा, जो उनके शैक्षणिक और रचनात्मक प्रोफाइल को मजबूत करेगा। कुल मिलाकर ‘बडिंग ऑथर प्रोग्राम’ बच्चों को किताबों के पाठ से आगे बढ़कर अपनी सोच गढ़ने और उसे कहानी का रूप देने की प्रेरणा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।