शेयर बाजार में आज 7 जनवरी को कमजोरी का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार से ही निवेशकों में सतर्कता नजर आई, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखा। सेंसेक्स करीब 200 अंकों की गिरावट के साथ 84,900 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी लगभग 50 अंक लुढ़ककर 26,150 के स्तर पर आ गया। ऑटो, बैंकिंग और FMCG सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का दबाव बाजार की चाल को नीचे खींचता नजर आया।
आज की गिरावट ऐसे समय में आई है जब निवेशक वैश्विक संकेतों और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली के मूड में दिख रहे हैं। खासतौर पर बैंकिंग और ऑटो शेयरों में कमजोरी ने बाजार की रफ्तार को थाम दिया। FMCG शेयरों में भी हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे कुल मिलाकर बाजार का रुख नकारात्मक बना रहा।
वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी मिले-जुले रहे। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी मजबूती के साथ ऊपर कारोबार करता दिखा, वहीं जापान का निक्केई इंडेक्स हल्की गिरावट में रहा। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में नजर आया, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजारों की बात करें तो 6 जनवरी को डाउ जोन्स में अच्छी तेजी देखने को मिली थी, जबकि नैस्डेक में गिरावट और S&P 500 में हल्की मजबूती रही थी। इन मिले-जुले वैश्विक संकेतों का असर आज भारतीय बाजार पर भी दिखा।
निवेशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 6 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सीमित खरीदारी की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में मजबूत समर्थन दिया। बीते कुछ महीनों से यह रुझान साफ है कि विदेशी निवेशक जहां मुनाफावसूली कर रहे हैं, वहीं घरेलू निवेशक बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दिसंबर 2025 में विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों की भारी खरीदारी ने बाजार को संतुलन में बनाए रखा था, और यही रुझान नवंबर महीने में भी देखने को मिला था।
गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले भी 6 जनवरी को बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स 376 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी कमजोरी रही थी। लगातार दूसरे दिन बाजार में आई इस नरमी से यह संकेत मिल रहा है कि फिलहाल निवेशक सतर्क हैं और आगे के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर आज की गिरावट को व्यापक घबराहट की बजाय मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के असर के तौर पर देखा जा रहा है। बाजार में घरेलू निवेशकों का समर्थन अब भी एक मजबूत आधार बना हुआ है, जिससे आने वाले सत्रों में स्थिरता की उम्मीद की जा सकती है।