शेयर बाजार में इन दिनों LG Electronics India के शेयरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बीते एक महीने में कंपनी का स्टॉक करीब 8.24–8.25 फीसदी टूट चुका है और रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच जाना इस बात का साफ संकेत देता है कि बाजार फिलहाल इस शेयर को लेकर असहज है। दिन के कारोबार में कभी-कभार हल्की खरीदारी जरूर दिखी, लेकिन वह गिरावट की धार को थाम नहीं सकी और कमजोरी बनी रही।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईपीओ के बाद लागू लॉक-इन पीरियड का खत्म होना मानी जा रही है। आमतौर पर लिस्टिंग के बाद प्रमोटर्स, शुरुआती निवेशक या कर्मचारियों को तय अवधि तक अपने शेयर बेचने की अनुमति नहीं होती। जैसे ही यह अवधि पूरी होती है, बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने की आशंका बन जाती है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मामले में तीन महीने के लॉक-इन के खत्म होते ही कंपनी की कुल इक्विटी का लगभग दो फीसदी हिस्सा संभावित रूप से बिक्री के लिए उपलब्ध हो गया। पिछले सत्र के भाव के हिसाब से इन शेयरों की कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इतनी बड़ी संभावित सप्लाई का अनुमान ही शेयर पर दबाव बनाने के लिए काफी साबित हुआ।
इस दबाव को ब्रोकरेज रिपोर्ट्स ने भी और गहरा किया। हाल में एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी पर कवरेज शुरू करते हुए अपेक्षाकृत सतर्क टारगेट प्राइस तय किया। रिपोर्ट में कहा गया कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं ज्यादा तीखी हो चुकी है और ग्राहकों की मोलभाव करने की ताकत भी बढ़ी है। भले ही एलजी की ब्रांड वैल्यू और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क उसकी बड़ी ताकत माने गए हों, लेकिन निकट अवधि में शेयर के प्रदर्शन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
अगर आईपीओ के बाद के सफर पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ होती है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का आईपीओ जबरदस्त चर्चा में रहा था और शेयर प्रीमियम के साथ लिस्ट होकर पहले ही दिन रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गया था। लेकिन कुछ ही महीनों में उसमें करीब 20 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। यह बदलाव दिखाता है कि शुरुआती उत्साह के बाद अब बाजार कंपनी के मूल्यांकन, ग्रोथ और प्रतिस्पर्धी माहौल को कहीं ज्यादा सख्ती से परख रहा है।