भारतीय शेयर बाजार पर दबाव लगातार गहराता जा रहा है। चौथे दिन भी बिकवाली थमी नहीं और निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल और विदेशी निवेशकों की आक्रामक बिकवाली के बीच घरेलू बाजार कमजोर नजर आया। इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका में रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाले प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की मंजूरी मानी जा रही है, जिसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का समर्थन बताया जा रहा है।
8 जनवरी को BSE Sensex 780 अंक से ज्यादा टूटकर 84,180 के आसपास बंद हुआ। हफ्ते की शुरुआत से अब तक सेंसेक्स करीब 1,580 अंक यानी लगभग 1.8% फिसल चुका है। वहीं Nifty 50 264 अंक टूटकर 25,876 के स्तर पर बंद हुआ। खास बात यह रही कि निफ्टी इस साल पहली बार 26,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। पिछले चार सत्रों में निफ्टी करीब 1.7% की गिरावट दर्ज कर चुका है।
बाजार पर सबसे बड़ा झटका उस खबर से लगा, जिसमें अमेरिका में एक द्विदलीय बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के तहत रूस से कारोबार जारी रखने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के बयान के मुताबिक यह दबाव चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर बनाया जाना है, ताकि वे रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करें। इसी आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। इसके अलावा एफआईआई की लगातार बिकवाली, साप्ताहिक एक्सपायरी और मेटल शेयरों में तेज गिरावट ने भी बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया।
तकनीकी नजरिए से देखें तो तेज गिरावट के बावजूद निफ्टी अभी भी अपने 55-दिन के ईएमए के ऊपर बना हुआ है, जो पहले कई बार मजबूत सपोर्ट साबित हुआ है। बाजार जानकारों का मानना है कि अगर निफ्टी 25,850 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिल सकती है। ऐसे में इंडेक्स 26,200 से 26,300 के दायरे की ओर उछाल ले सकता है।
हालांकि सभी एक्सपर्ट इतने आशावादी नहीं हैं। प्राइमस पार्टनर्स के एमडी श्रवण शेट्टी के मुताबिक मौजूदा माहौल में बाजार तकनीकी रूप से कमजोर दिख रहा है और रुख बदलने के लिए किसी मजबूत बाहरी सकारात्मक संकेत की जरूरत होगी। अमेरिका के ऊंचे टैरिफ प्रस्ताव, एफआईआई की बिकवाली और कमजोर वैश्विक सेंटिमेंट के चलते दबाव आगे भी बना रह सकता है। उनका मानना है कि 25,900 के आसपास निफ्टी को कड़ा रेजिस्टेंस मिल सकता है।
कुल मिलाकर लगातार चार दिन की गिरावट यह साफ संकेत देती है कि बाजार फिलहाल दबाव में है। कुछ अहम सपोर्ट लेवल जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि बाजार ने शॉर्ट-टर्म बॉटम बना लिया है। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों का रुख तय करेगा कि यह गिरावट यहीं थमेगी या आगे और गहराएगी।