छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कक्षा 4थीं के अंग्रेजी प्रश्न पत्र में ‘मोना के कुत्ते के नाम’ पर विवाद चल रहा है। इसके उत्तर के चार विकल्पों में ‘राम’ नाम भी शामिल था। अन्य विकल्प बाला, शेरू और ‘कोई नहीं’ दिए गए थे। ये प्रश्न पत्र रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिले में बांटा गया था।
‘राम’ नाम को लेकर हिंदू संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई है। अब जांच के बाद शिक्षा विभाग ने पेपर तैयार करने वाली प्रधान पाठक को निलंबित कर दिया है, जबकि मॉडरेटर शिक्षिका को सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
टीचर्स ने लिखित में माफी भी मांगी है। उन्होंने स्पष्टीकरण में कहा कि, उनका उद्देश्य ‘रामू (RAMU)’ लिखने का था, लेकिन टाइपिंग में ‘U’ छूट गया और ‘RAM’ छप गया।
राम का विकल्प देने से धार्मिक भावना आहत हुई
वहीं, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर ने 5 सदस्यीय जांच समिति बनाई है। समिति ने प्रश्न पत्र निर्माण, मॉडरेशन और अंतिम मुद्रण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की। जिसमें बताया गया कि राम हिन्दू धर्म के आराध्य देव है, विकल्प के रूप में राम का विकल्प देने से धार्मिक भावना आहत हुई है।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि, प्रश्न पत्र शिखा सोनी, प्रधान पाठक, शासकीय प्राथमिक स्कूल नकटी (खपरी), तिल्दा की ओर से तैयार किया गया था। प्रश्न पत्र का मॉडरेशन नम्रता वर्मा, सहायक शिक्षक (संविदा), सेजेस उ.मा.वि. फाफाडीह रायपुर ने किया। अंतिम रूप से जो प्रश्न पत्र परीक्षा में वितरित हुआ। उसमें विवादित विकल्प शामिल रहा। दोनों शिक्षिकाओं ने अपने-अपने स्पष्टीकरण में त्रुटि स्वीकार की।
‘रामू’ की जगह ‘राम’ लिखने की सफाई
प्रधान पाठक शिखा सोनी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि, उनका उद्देश्य ‘रामू (RAMU)’ लिखने का था, लेकिन टाइपिंग में ‘U’ छूट गया और ‘RAM’ छप गया। उन्होंने इसे अनजाने में हुई गलती बताते हुए क्षमा मांगी। वहीं, मॉडरेटर नम्रता वर्मा ने कहा कि उन्हें जो सेट मिला, उसमें विकल्प यथावत रखे गए और उनसे भी यह त्रुटि नजरअंदाज हो गई।
अब जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, 6 जनवरी को एग्जाम के बाद क्वेश्चन पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद NSUI रायपुर ने बुधवार (7 जनवरी) को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने इसे विभागीय गलती स्वीकार करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग से गलती हुई है।
हिमांशु भारती ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक समिति गठित की जा रही है, जो 7 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें जिसकी भी गलती सामने आएगी, कार्रवाई होगी।
कैसे बना चौथी कक्षा का पेपर ?
दरअसल, सरकारी स्कूलों में चौथी क्लास के स्टूडेंट्स के लिए मिड-टर्म एग्जाम 6 जनवरी 2025 को था। क्वेश्चन पेपर बनाने की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा की APC (असिस्टेंट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर) सैम्पा बोस को दी गई थी।
सैम्पा ने एक एक्सपर्ट कमेटी से क्वेश्चन पेपर तैयार करवाया, जिसमें पांच टीचर थे। वहीं मामला सामने आने के बाद सैम्पा ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने जो पीडीएफ भेजा, उसमें से कोई पर्चा अब तक नहीं छपा है।
किसी की भावना को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं- DEO
महासमुंद DEO विजय लहरे ने कहा था कि, हमारे जिले में छमाही परीक्षा के प्रश्नपत्र में यह सभी बात सामने आई है। राम नाम की बात संज्ञान में आते ही विकल्प को विलोपित किया और अन्य प्रश्न पत्र बांटे हैं। हमारे जिले से जो प्रश्नपत्र बनाए गए थे। वो इसमें नहीं छप पाया है।
DEO विजय लहरे ने बताया कि छपाई करने वाले ने किसी दूसरे सेट का प्रश्न छाप दिया है। मैंने छपाई करने वाले को पत्र लिखा है। इसमें किसी को कष्ट पहुंचा है तो इसका मैं खेद व्यक्त करता हूं। मैं खुद भी हिंदू हूं और श्रीराम का भक्त हूं। मेरा किसी की भावना को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं है।
DEO बोले- जो छपा उनका भेजा हुआ प्रश्न पत्र नहीं
वहीं महासमुंद DEO विजय लहरे का कहना है कि विषय विशेषज्ञ से मिला पर्चा वेंडर आदेश श्रीवास्तव को भेजा गया था, जो छपकर वितरित हुआ, वह उनका भेजा हुआ प्रश्न पत्र नहीं है। कृति ऑफसेट पब्लिशिंग हाउस से गलती हुई है।
वहीं जवाब में कृति ऑफसेट पब्लिशिंग हाउस के मालिक आदेश श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने सिर्फ वही पर्चा प्रिंट किया था, जो उन्हें महासमुंद DEO ऑफिस से भेजा गया था। इसके अलावा कोई दूसरा पर्चा नहीं छापा है। उनको जितना बोला गया था, उन्होंने उतना किया है।
यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं- NSUI
NSUI के रायपुर जिला अध्यक्ष शांतनु झा ने कहा कि, यह मामला केवल तकनीकी या मुद्रण संबंधी गलती नहीं है, बल्कि भाजपा सरकार के संरक्षण में चल रही शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक है। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर छपाई और वितरण तक पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की बनती है।
शांतनु झा ने आरोप लगाया कि “प्रिंटर की गलती” कहकर हर बार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब यह स्वीकार्य नहीं है। जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने, दोषियों को बचाने या सरकार की जिम्मेदारी से ध्यान भटकाने का प्रयास किया गया, तो संगठन प्रदेशव्यापी और उग्र आंदोलन करेगा।