भारतीय शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे सत्र भी कमजोरी का माहौल हावी नजर आया। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों में सतर्कता दिखी और हर बढ़त पर बिकवाली होती रही। इसी दबाव के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सुबह करीब 9:46 बजे सेंसेक्स 403 अंक से ज्यादा टूटकर 83,173 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी भी फिसलकर 25,595 के नीचे ट्रेड करता दिखाई दिया। यह गिरावट साफ तौर पर बताती है कि फिलहाल बाजार में भरोसे की कमी बनी हुई है और निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
बाजार की कमजोरी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज दबाव देखने को मिला, जहां मिडकैप इंडेक्स करीब एक प्रतिशत गिरा, वहीं स्मॉलकैप में उससे भी ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। इसका सीधा असर कुल बाजार पूंजीकरण पर पड़ा और बीएसई का मार्केट कैप घटकर लगभग 465.92 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया। आमतौर पर जब बाजार में डर बढ़ता है, तो सबसे पहले छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों से निवेशक दूरी बनाते हैं, और आज का सत्र इसी प्रवृत्ति की पुष्टि करता नजर आया।
सेक्टोरल मोर्चे पर भी तस्वीर ज्यादा उत्साहजनक नहीं रही। लगभग सभी प्रमुख सेक्टर बिकवाली की चपेट में दिखे। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी और हेल्थकेयर जैसे दिग्गज सेक्टरों में कमजोरी ने बाजार की धारणा को और नकारात्मक बना दिया। केवल मेटल सेक्टर ऐसा रहा, जहां सीमित स्तर पर मजबूती देखने को मिली, लेकिन वह भी बाजार को संभालने के लिए काफी नहीं रही। इसका मतलब यह है कि इस वक्त बाजार को सहारा देने वाला कोई मजबूत सेक्टर उभरकर सामने नहीं आ रहा।
इस बीच अस्थिरता का पैमाना माने जाने वाला इंडिया VIX करीब 8 प्रतिशत उछल गया, जिसने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। VIX में तेजी का संकेत यही होता है कि आने वाले दिनों में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर बड़े फैसले टालते हैं और कैश पोजीशन को प्राथमिकता देते हैं।
बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से कहीं ज्यादा रही, और बड़ी संख्या में स्टॉक्स अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर के आसपास पहुंचते दिखे। इसके उलट, नए उच्च स्तर या अपर सर्किट में पहुंचने वाले शेयरों की गिनती बेहद सीमित रही। कुल मिलाकर, यह सत्र निवेशकों के लिए सावधानी का संकेत देता है।
मौजूदा हालात इस ओर इशारा करते हैं कि वैश्विक संकेतों, घरेलू आर्थिक आंकड़ों और आगे आने वाले नीतिगत फैसलों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। जब तक बाजार को कोई ठोस सकारात्मक संकेत नहीं मिलता, तब तक उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में विशेषज्ञों की सलाह यही है कि निवेशक जल्दबाजी में कदम न उठाएं, अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों पर फोकस रखें और मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में ही भरोसा बनाए रखें।