रायपुर में जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री के दौरान स्टाम्प शुल्क में गड़बड़ी कर वर्षों से चल रही कर चोरी पर अब सरकार ने निर्णायक प्रहार कर दिया है। भारतीय स्टाम्प (छत्तीसगढ़ संशोधन) के जरिए नियमों को सख्त करते हुए यह साफ कर दिया गया है कि जानबूझकर कम स्टाम्प लगाकर कर अपवंचन करने वालों को अब किसी भी सूरत में राहत नहीं मिलेगी। नए प्रावधानों के तहत यदि रजिस्ट्री के समय स्टाम्प कम पाया गया, तो रजिस्ट्री की तारीख से ही हर महीने 2 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। इतना ही नहीं, विवाद की स्थिति में अपील करने से पहले ही स्टाम्प की तय राशि का 25 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य होगा।
इस संशोधन के तहत मूल अधिनियम की धारा 35 में बदलाव किया गया है। अब कोई भी ऐसी लिखत, जिस पर पूरा स्टाम्प शुल्क नहीं लगाया गया है, तब तक साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होगी, जब तक कि स्टाम्प की कमी की रकम के साथ-साथ लिखत के निष्पादन की तारीख से प्रतिमाह 2 प्रतिशत की शास्ति का भुगतान नहीं कर दिया जाता। यानी अब समय के साथ देनदारी बढ़ती जाएगी और देरी करना सीधे नुकसान का सौदा साबित होगा।
इस बदलाव के पीछे सरकार का साफ तर्क है। रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े जानकारों के मुताबिक, लंबे समय से राज्य में स्टाम्प शुल्क की चोरी एक तरह का “सिस्टम” बन चुकी थी। जानबूझकर कम स्टाम्प लगाया जाता था, क्योंकि विवाद की स्थिति में वर्षों तक केस चलता रहता और आखिर में भी उतनी ही राशि चुकानी पड़ती, जितनी सही स्टाम्प पर लगती। इस दौरान बची हुई रकम से कारोबारी ब्याज कमाते रहते थे। अपील की प्रक्रिया भी इसी खेल का हिस्सा बन चुकी थी, जहां फैसले आने में सालों लग जाते थे।
अब इस रास्ते को बंद करते हुए यह प्रावधान जोड़ा गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्टाम्प की कमी को लेकर कलेक्टर के समक्ष अपील में जाना चाहता है, तो पहले ही कम से कम 25 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। बिना इस अग्रिम जमा के अपील स्वीकार ही नहीं की जाएगी। जमा की गई राशि बाद में अपीलीय अधिकारी के अंतिम आदेश के अनुसार समायोजित या वापस की जा सकेगी, लेकिन अपील को टालने या लंबा खींचने का रास्ता अब आसान नहीं रहेगा।
सरकार के इस फैसले को रियल एस्टेट और रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। साफ है कि अब स्टाम्प शुल्क में हेराफेरी करना महंगा पड़ेगा और कर अपवंचन पर लगाम कसने की मंशा पूरी ताकत के साथ दिख रही है। यह कदम छत्तीसगढ़ में राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ ईमानदार खरीदार-विक्रेताओं के हित में भी अहम माना जा रहा है।
Government of Chhattisgarh