IND vs NZ: ‘मां के पास रहती हैं मेरी ट्रॉफियां’—प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड पर विराट कोहली का दिल छू लेने वाला खुलासा

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भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े नामों में शुमार Virat Kohli मैदान पर जितने आक्रामक और आत्मविश्वास से भरे नजर आते हैं, निजी जिंदगी में उतने ही सादगी पसंद हैं। साल के पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ दबाव भरे रनचेज में 93 रनों की शानदार पारी खेलकर भारत को 301 रन के लक्ष्य तक पहुंचाने वाले कोहली इस बार अपनी बल्लेबाजी से ज्यादा एक भावुक खुलासे को लेकर चर्चा में आ गए।

भारत की जीत के बाद उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान कोहली ने मुस्कराते हुए बताया कि वह अपने व्यक्तिगत अवॉर्ड्स खुद अपने पास नहीं रखते। उन्होंने कहा कि उनकी सभी ट्रॉफियां गुरुग्राम में उनकी मां के पास रहती हैं। कोहली के शब्दों में, उन्हें लगता है कि उनकी मां को इन अवॉर्ड्स को संभालकर रखना अच्छा लगता है, इसलिए हर ट्रॉफी सीधे वहीं भेज दी जाती है। यह बात सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और फैंस एक बार फिर उनके जमीन से जुड़े व्यक्तित्व के कायल हो गए।

अपने क्रिकेट सफर को याद करते हुए कोहली ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उनका पूरा करियर किसी सपने से कम नहीं लगता। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने हमेशा अपनी काबिलियत पर भरोसा रखा और जहां आज हैं, वहां पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है। कोहली के मुताबिक भगवान ने उन्हें जरूरत से ज्यादा दिया है, जिसके लिए उनके मन में गहरा आभार है और उन्हें खुद पर गर्व महसूस होता है।

विराट कोहली का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। कप्तान के रूप में टीम को ऊंचाइयों तक ले जाना हो या मुश्किल हालात में रन चेज को संभालना—हर मोर्चे पर उन्होंने खुद को साबित किया है। उनके नाम दर्जनों प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड दर्ज हैं, लेकिन कोहली के लिए ये महज शोपीस नहीं हैं। ये उस संघर्ष, समर्पण और सफर की याद हैं, जिसे उन्होंने मैदान तक पहुंचने में जिया है।

हाल के वर्षों में भले ही विराट ने टी20 और टेस्ट फॉर्मेट से दूरी बना ली हो, लेकिन वनडे क्रिकेट में उनकी चमक आज भी कायम है। यही वह फॉर्मेट है जिसमें उन्होंने सबसे ज्यादा रन बनाए हैं और आज भी भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज माने जाते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई 93 रनों की पारी इसका ताजा सबूत है, जहां शतक से चूकने के बावजूद उन्होंने टीम को जीत दिलाकर दिखा दिया कि बड़े मैचों का खिलाड़ी आज भी विराट कोहली ही हैं। मैदान पर रिकॉर्ड बनाना और घर में मां के पास सहेजी गई ट्रॉफियां—यही विराट कोहली की असली पहचान है।

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