भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार में एक नया नाम बेहद तेजी से अपनी जगह बनाता नजर आ रहा है। वियतनाम की EV निर्माता कंपनी VinFast ने भारत में एंट्री के महज चार महीनों के भीतर 1,000 इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ विनफास्ट अब Tata Motors, Mahindra और MG Motor India के बाद देश की चौथी सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी के रूप में उभरकर सामने आई है।
आंकड़े बताते हैं कि 2026 की शुरुआत विनफास्ट के लिए काफी उत्साहजनक रही है। 2025 के आखिरी तीन महीनों में कंपनी ने करीब 830 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की थी, जबकि नए साल के शुरुआती दिनों में ही 200 से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिक चुकी हैं। इससे साफ है कि भारतीय ग्राहकों के बीच कंपनी के मॉडल तेजी से स्वीकार किए जा रहे हैं।
विनफास्ट ने भारतीय बाजार में सितंबर में कदम रखा था और मिड-साइज इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में दो मॉडल लॉन्च किए थे— VinFast VF 6 और VinFast VF 7। इन दोनों ही गाड़ियों को प्रीमियम डिजाइन, दमदार रेंज और आधुनिक फीचर्स की वजह से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
VF 6 को एक प्रीमियम कॉम्पैक्ट SUV के तौर पर पेश किया गया है, जिसमें 59.6 kWh की बैटरी दी गई है। यह बैटरी फास्ट चार्जिंग के जरिए सिर्फ 25 मिनट में 10% से 70% तक चार्ज हो जाती है और एक बार फुल चार्ज पर करीब 468 किलोमीटर की ARAI सर्टिफाइड रेंज देती है। दूसरी ओर VF 7 ज्यादा बोल्ड और बड़ी SUV है, जिसकी लंबाई 4.5 मीटर से ज्यादा और व्हीलबेस 2,840 mm है। इसमें 59.6 kWh और 70.8 kWh के दो बैटरी ऑप्शन, पांच वेरिएंट और FWD व AWD दोनों ड्राइवट्रेन विकल्प दिए गए हैं, जो इसे प्रीमियम EV सेगमेंट में मजबूत दावेदार बनाते हैं।
भारत में विनफास्ट की रणनीति सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं है। कंपनी की इलेक्ट्रिक कारें तमिलनाडु के तूतुकुड़ी में स्थित असेंबली प्लांट में तैयार की जा रही हैं, जिसकी शुरुआती सालाना क्षमता 50,000 यूनिट्स है। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाकर 1,50,000 यूनिट्स तक ले जाने की योजना भी है। लोकल असेंबली पर जोर देकर कंपनी न सिर्फ लागत को नियंत्रित कर रही है, बल्कि भारत में रोजगार सृजन की दिशा में भी योगदान दे रही है।
कुल मिलाकर, कम समय में 1,000 यूनिट्स की बिक्री यह संकेत देती है कि भारतीय EV बाजार में मुकाबला और तेज होने वाला है। विनफास्ट की यह तेज शुरुआत आने वाले समय में टाटा, महिंद्रा और MG जैसी स्थापित कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है।