जब भी आईसीसी का कोई बड़ा टूर्नामेंट शुरू होता है, भारत का नाम सबसे पहले फेवरेट के तौर पर लिया जाता है, और अंडर-19 वर्ल्ड कप में तो यह पहचान और भी पुख्ता रही है। रिकॉर्ड पांच बार खिताब जीत चुकी India U-19 टीम ने पिछले पांच संस्करणों में लगातार फाइनल खेलकर यह साबित किया है कि उसकी बेंच स्ट्रेंथ और सिस्टम दुनिया में सबसे मजबूत है। पिछली बार फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार जरूर चुभी थी, लेकिन उसके बाद से भारत ने खुद को और धारदार बनाया है।
2024 के फाइनल के बाद भारतीय टीम ने इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका जैसे कठिन दौरों पर 21 यूथ वनडे मुकाबले खेले। यही निरंतर तैयारी पहले यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल और ऋषभ पंत जैसे सितारे देश को दे चुकी है। भले ही हाल के वर्षों में अंडर-19 से सीधे सीनियर टीम तक पहुंचने की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई हो, लेकिन इस बार कप्तान आयुष म्हात्रे की अगुआई में टीम अलग आत्मविश्वास के साथ उतरी है।
भारत की सबसे बड़ी ताकत 15 साल के वैभव सूर्यवंशी माने जा रहे हैं। इतनी कम उम्र में जिस तरह उन्होंने पावर हिटिंग को सहज बना दिया है, वह विरोधी टीमों के लिए चिंता का कारण है। आईपीएल, यूथ वनडे और टी20—हर मंच पर उनके बल्ले से रन निकल रहे हैं। पिछले साल सिर्फ 60 गेंदों में दो शतक जड़ना उनकी प्रतिभा का बड़ा उदाहरण है। एशिया कप में आलोचना झेलने के बावजूद उनके खेल में कोई गिरावट नहीं दिखी, जो मानसिक मजबूती का संकेत है।
भारतीय बल्लेबाज़ी सिर्फ वैभव तक सीमित नहीं है। अभिज्ञान कुंडू ने एशिया कप में मलेशिया के खिलाफ यूथ वनडे में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। चार पारियों में 276 रन और 142 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट बताता है कि वह किसी भी गेंदबाज़ी आक्रमण को तहस-नहस कर सकते हैं। उपकप्तान विहान मल्होत्रा मिडिल ऑर्डर में भरोसेमंद कड़ी साबित हुए हैं, और यही वजह रही कि उन्हें आईपीएल 2026 ऑक्शन में आरसीबी ने चुना। नंबर तीन पर एरॉन जॉर्ज की निरंतरता भी भारत को अतिरिक्त मजबूती देती है।
गेंदबाज़ी में तमिलनाडु के तेज़ गेंदबाज़ दीपेश देवेंद्रन अपनी रफ्तार और उछाल से मैच का रुख पलटने का दम रखते हैं। ऑलराउंड विकल्प के तौर पर रणजी खेल चुके आर.एस. अम्बरीश और ऑफ-स्पिन के साथ उपयोगी बल्लेबाज़ी करने वाले कनिष्क चौहान भी अहम साबित हो सकते हैं। हालांकि ज़िम्बाब्वे और नामीबिया की परिस्थितियों में भारत के लिए राह पूरी तरह आसान नहीं होगी।
सबसे बड़ा खतरा पाकिस्तान से माना जा रहा है। Pakistan U-19 एशिया कप जीतकर टूर्नामेंट में उतरी है और कप्तान फरहान यूसुफ के नेतृत्व में टीम आत्मविश्वास से लबरेज़ है। समीर मिन्हास ने एशिया कप फाइनल में भारत के खिलाफ 172 रन ठोककर टूर्नामेंट में कुल 471 रन बनाए थे। गेंदबाज़ी में अब्दुल सुभान और अली रज़ा जैसे विकल्प किसी भी बल्लेबाज़ी क्रम को झकझोर सकते हैं।
बांग्लादेश को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। Bangladesh U-19 इंग्लैंड और ज़िम्बाब्वे दौरों के बाद संतुलित नजर आ रही है। तेज़ गेंदबाज़ इक़बाल हुसैन इमोन आक्रमण की अगुवाई करेंगे, जबकि बल्लेबाज़ी में ज़ावाद अबरार और रीज़ान हसन से बड़ी पारियों की उम्मीद होगी। डिफेंडिंग चैंपियन Australia U-19 और मज़बूत England U-19 भी खिताब की दौड़ में बने हुए हैं।
कुल मिलाकर तस्वीर साफ है—भारत इस अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 का सबसे बड़ा दावेदार जरूर है, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी टीमें एक छोटी सी चूक को भी बड़े उलटफेर में बदल सकती हैं। टूर्नामेंट की लंबी दूरी और नॉकआउट दबाव में वही टीम बाज़ी मारेगी, जो मौके पर संयम और निरंतरता दिखाएगी।