बलौदाबाजार जिले में हुई हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने अब जांच एजेंसियों को और सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। छत्तीसगढ़ क्रांति सेवा के प्रमुख अमित बघेल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए जांच का दायरा तेज़ी से बढ़ा दिया है। गुरुवार शाम पुलिस टीम अमित बघेल को लेकर रायपुर पहुंची, जहां कंचनगंगा फेज-2 स्थित उनके निवास पर छापेमारी कर अहम साक्ष्य जुटाए गए। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनका मोबाइल फोन और चारपहिया वाहन जब्त किया, जिन्हें अब डिजिटल और फॉरेंसिक जांच के दायरे में लिया गया है।
इसके बाद पुलिस की टीम रायपुर के मैग्नेटो मॉल स्थित उनके कार्यालय पहुंची, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों से हिंसा की साजिश, संपर्क सूत्रों और संभावित वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। जब्ती के बाद पुलिस अमित बघेल को वापस बलौदाबाजार लेकर आई, जहां उन्हें पुलिस लाइन के आजाक थाना कंट्रोल रूम में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा गया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब्त मोबाइल और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और कागजी साक्ष्यों के आधार पर अब उन अन्य लोगों की पहचान की जा रही है, जिनकी भूमिका इस हिंसा-आगजनी प्रकरण में संदिग्ध मानी जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
इस मामले में पहले ही छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव और जोहर पार्टी के सचिव दिनेश वर्मा की गिरफ्तारी हो चुकी है। सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तारी की सूची अभी खत्म नहीं हुई है और इसमें कई प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं। अब तक कुल 198 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन विवेचना लगातार जारी है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के कुछ और बड़े पदाधिकारियों पर भी जल्द कार्रवाई हो सकती है, जिनमें दो महिला पदाधिकारी और अन्य प्रमुख चेहरे जांच के घेरे में आ चुके हैं।
इधर, जोहर छत्तीसगढ़ पार्टी ने भी आगे की गिरफ्तारियों को लेकर आशंका जताई है। पार्टी प्रवक्ता चंद्रकांत यदु का कहना है कि प्रशासन उनके संगठन के और नेताओं को निशाना बना सकता है। उन्होंने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि इस प्रकरण में और कितनी गिरफ्तारियां होनी हैं, ताकि वे स्वयं अपने नेताओं को प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर सकें। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सरकार दबाव की राजनीति कर रही है और बिना ठोस कारण गिरफ्तारियां की जा रही हैं।
अब पूरा प्रदेश इस सवाल पर नजर लगाए हुए है कि बलौदाबाजार पुलिस की अगली कार्रवाई क्या होगी और इस मामले में अभी कितने और बड़े नाम उजागर होंगे। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस हिंसा-आगजनी प्रकरण की असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।