सोना बना सुपरहिट निवेश: SGB ने 5 साल में दिया 4 गुना रिटर्न, अब प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन का मौका

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सोने में निवेश करने वालों के लिए 16 जनवरी 2026 एक बेहद खास तारीख बन गई है। जिन निवेशकों ने Sovereign Gold Bond 2019–20 सीरीज-II में पैसा लगाया था, उनके लिए अब प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन का रास्ता खुल गया है। Reserve Bank of India ने इस सीरीज के लिए अर्ली एग्जिट की घोषणा की है, क्योंकि इस बॉन्ड ने अपने जरूरी 5 साल पूरे कर लिए हैं। नियमों के मुताबिक, SGB की कुल अवधि भले ही 8 साल होती है, लेकिन पांचवें साल के बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर निवेशक समय से पहले बाहर निकल सकते हैं।

यह सीरीज 16 जनवरी 2019 को जारी की गई थी और ठीक 5 साल पूरे होने के बाद 16 जनवरी 2026 को निवेशकों को प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन का अवसर मिल रहा है। खास बात यह है कि इस दौरान सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी ने SGB को बीते कुछ सालों के सबसे सफल निवेश विकल्पों में शामिल कर दिया है।

आरबीआई ने इस सीरीज के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस ₹14,092 प्रति यूनिट तय किया है। यह कीमत 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कारोबारी दिनों—12, 13 और 14 जनवरी 2026—की औसत क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय की गई है, जिसे Indian Bullion and Jewellers Association प्रकाशित करता है। यानी निवेशकों को रिडेम्प्शन पर मौजूदा बाजार भाव के करीब कीमत मिल रही है।

अगर रिटर्न की बात करें तो आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं। जब यह बॉन्ड जारी हुआ था, तब इसका इश्यू प्राइस करीब ₹3,393 प्रति यूनिट था। आज उसी यूनिट पर ₹14,092 मिल रहे हैं, यानी करीब ₹10,700 का सीधा मुनाफा। प्रतिशत में देखें तो यह लगभग 315% से ज्यादा का रिटर्न बनता है, वो भी सिर्फ गोल्ड प्राइस बढ़ने से। इसके अलावा निवेशकों को हर साल 2.5% का फिक्स्ड ब्याज भी मिलता रहा है, जो हर छह महीने में खाते में आया। इस तरह कुल रिटर्न और भी मजबूत हो गया।

मान लीजिए किसी निवेशक ने 2019 में इस SGB में ₹1 लाख का निवेश किया था, तो आज प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर उसे करीब ₹4.1 लाख से ज्यादा मिल सकते हैं। इसमें अब तक मिला ब्याज अलग से जोड़ दिया जाए, तो कुल फायदा और बढ़ जाता है। यही वजह है कि SGB को लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की प्रक्रिया भी काफी सरल है। निवेशक को उसी बैंक, पोस्ट ऑफिस या एजेंट के पास आवेदन करना होता है, जहां से बॉन्ड खरीदा गया था। आमतौर पर रिडेम्प्शन डेट से कुछ दिन पहले आवेदन देना पड़ता है। तय तारीख पर रिडेम्प्शन की राशि सीधे निवेशक के रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में जमा कर दी जाती है, किसी अतिरिक्त झंझट के बिना।

टैक्स के नजरिए से भी SGB निवेशकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ है। SGB पर मिलने वाला सालाना ब्याज टैक्सेबल जरूर होता है, लेकिन मैच्योरिटी या प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर मिलने वाले कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता। यही टैक्स छूट इसे फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ETF की तुलना में और ज्यादा आकर्षक बनाती है।

कुल मिलाकर, SGB 2019–20 सीरीज-II ने यह साबित कर दिया है कि सही समय पर किया गया गोल्ड निवेश न सिर्फ महंगाई से बचाव करता है, बल्कि लंबी अवधि में जबरदस्त रिटर्न भी दे सकता है।

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