भारत ने डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। कमर्शियल 5G सेवाएं शुरू हुए अभी तीन साल भी पूरे नहीं हुए हैं और इसी बीच भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G यूज़र बेस वाला देश बन गया है। सरकारी आंकड़ों और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में 5G इस्तेमाल करने वालों की संख्या 40 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो भारत के टेलीकॉम सेक्टर की तेज़ रफ्तार और डिजिटल क्षमता को दर्शाता है।
केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, भारत में 5G सब्सक्राइबर्स की संख्या 400 मिलियन से अधिक हो चुकी है। इस उपलब्धि के साथ भारत केवल चीन से पीछे है, जहां 1 बिलियन से ज्यादा 5G यूज़र्स हैं। भारत के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और जापान का स्थान आता है। खास बात यह है कि 2025 के अंत तक भारत में करीब 394 मिलियन 5G यूज़र्स होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन देश ने यह आंकड़ा तय समय से पहले ही पार कर लिया।
भारत में 5G की नींव अक्टूबर 2022 में रखी गई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के मंच से आधिकारिक तौर पर 5G सेवाओं की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सिर्फ तेज़ इंटरनेट देना नहीं था, बल्कि ‘डिजिटल इंडिया’ विज़न को नई ऊंचाई पर ले जाना था। इस दौरान देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने 5G टेक्नोलॉजी के ज़रिए हेल्थकेयर, एजुकेशन, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग को भी दिखाया।
5G रोलआउट में सबसे आक्रामक शुरुआत Reliance Jio ने की, जिसने अक्टूबर 2022 में Jio True 5G लॉन्च किया। इसके तुरंत बाद Bharti Airtel ने भी अपने 5G Plus नेटवर्क को शुरू कर दिया। वहीं Vodafone Idea ने 5G की दौड़ में थोड़ी देर से कदम रखा और 2024 में सेवाएं शुरू करने के बाद 2025 से बड़े स्तर पर नेटवर्क विस्तार की योजना बनाई। इस दौरान टेलीकॉम कंपनियों ने नए टावर, फाइबर बैकहॉल और आधुनिक नेटवर्क आर्किटेक्चर पर भारी निवेश किया।
भारत में 5G की तेज़ रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी किफ़ायती कीमतें मानी जा रही हैं। अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोप जैसे देशों की तुलना में भारत में मोबाइल डेटा बेहद सस्ता है, यहां तक कि 5G सेवाओं के लिए भी। हाल के वर्षों में टैरिफ बढ़ने के बावजूद भारत अभी भी दुनिया के सबसे सस्ते डेटा मार्केट्स में शामिल है। इसके अलावा कई कंपनियां मौजूदा प्लान्स के साथ बिना अतिरिक्त शुल्क के 5G एक्सेस दे रही हैं, जिससे यूज़र्स तेजी से इस नई टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं।
भविष्य की बात करें तो भारत में 5G का सफर अभी लंबा है। स्वीडन की टेलीकॉम कंपनी Ericsson की मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, 2031 तक भारत में 1 बिलियन यानी 100 करोड़ 5G सब्सक्रिप्शन हो सकते हैं और 5G की पैठ करीब 79 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में प्रति स्मार्टफोन औसतन 36GB डेटा हर महीने इस्तेमाल हो रहा है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है और 2031 तक यह खपत 65GB प्रति माह तक पहुंच सकती है।
कुल मिलाकर, भारत का 5G सफर अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को नए स्तर पर ले जा रहा है।