शेयर बाजार में सोमवार, 19 जनवरी को भारत कोकिंग कोल लिमिटेड यानी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ने जबरदस्त एंट्री कर ली। आईपीओ में ₹23 के इश्यू प्राइस पर आया यह शेयर लिस्टिंग के दिन ही ₹45 पर खुला, यानी करीब 96 प्रतिशत का शानदार प्रीमियम। लिस्टिंग के साथ ही यह साफ हो गया कि निवेशकों का भरोसा इस सरकारी कंपनी पर पूरी तरह कायम है और बाजार ने इसे खुले दिल से स्वीकार किया है।
इस आईपीओ को लेकर निवेशकों में जो उत्साह दिखा, वह सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों से ही झलक गया था। तीन दिन में यह इश्यू कुल 143.85 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि रिटेल निवेशकों ने इसे 49.37 गुना भर दिया। दिलचस्प बात यह रही कि ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर जहां लिस्टिंग करीब 59 प्रतिशत प्रीमियम पर होने का अनुमान लगाया जा रहा था, वहीं असल बाजार में शेयर ने उम्मीद से कहीं ज्यादा छलांग लगा दी।
भारत कोकिंग कोल का यह आईपीओ 9 जनवरी को खुला था और इसे नए साल का पहला बड़ा पब्लिक ऑफर माना गया। यह पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’ था, यानी इससे जुटाई गई रकम कंपनी के पास नहीं जाकर इसकी प्रमोटर कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड को मिली। पहले इसकी लिस्टिंग 16 जनवरी को होनी थी, लेकिन किसी कारणवश इसे टाल दिया गया था। आखिरकार 19 जनवरी को इसकी दमदार लिस्टिंग ने इंतजार का पूरा फल दे दिया।
आईपीओ का प्राइस बैंड ₹21 से ₹23 प्रति शेयर रखा गया था और निवेशकों को कम से कम 600 शेयरों के एक लॉट के लिए बोली लगानी थी, जिसके लिए अधिकतम ₹13,800 का निवेश जरूरी था। सब्सक्रिप्शन की आखिरी तारीख 13 जनवरी थी और तब तक निवेशकों की भारी भागीदारी साफ नजर आ चुकी थी।
हालांकि कंपनी सरकारी होने के बावजूद इसमें कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं। चूंकि यह ऑफर फॉर सेल है, इसलिए निवेशकों का पैसा सीधे कोल इंडिया के पास गया, न कि कंपनी के विस्तार या नए प्रोजेक्ट्स में। इसके अलावा, सरकारी कंपनियों का प्रदर्शन काफी हद तक नीतियों और वैश्विक बाजार में कोयले की कीमतों पर निर्भर करता है। भारत कोकिंग कोल का संचालन भी झरिया और रानीगंज जैसे सीमित भौगोलिक क्षेत्रों तक केंद्रित है, जहां किसी भी तरह की पर्यावरणीय या रेगुलेटरी अड़चन उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
फिर भी कंपनी का फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड इसे मजबूत बनाता है। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी ने करीब ₹13,803 करोड़ का रेवेन्यू और ₹1,564 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी पूरी तरह कर्ज मुक्त है और इसके पास मजबूत कैश फ्लो मौजूद है। लिस्टिंग के बाद भी कोल इंडिया की हिस्सेदारी इसमें करीब 90 प्रतिशत बनी रहेगी।
उत्पादन के मोर्चे पर भारत कोकिंग कोल की पकड़ काफी मजबूत है। वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 58.5 प्रतिशत रही। 1 अप्रैल 2024 तक कंपनी के पास लगभग 7,910 मिलियन टन कोयले का भंडार था। स्टील और पावर सेक्टर के लिए यह कंपनी अहम भूमिका निभाती है। 2021 के बाद से हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी के बढ़ते इस्तेमाल से इसकी उत्पादन क्षमता में भी इजाफा हुआ है। फिलहाल कंपनी 34 खदानों का संचालन कर रही है और झरिया व रानीगंज कोलफील्ड के 288 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैली हुई है।
कोकिंग कोल की मांग लगातार बनी हुई है, क्योंकि इसका इस्तेमाल स्टील बनाने की भट्टियों में होता है। भारत को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है, ऐसे में घरेलू स्तर पर भारत कोकिंग कोल जैसी कंपनी की अहमियत और भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि निवेशकों ने इस आईपीओ में भरोसा दिखाया और लिस्टिंग के दिन ही शानदार रिटर्न के साथ इसका इनाम भी पा लिया।