छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) के करीब 660 करोड़ रुपये के दवा और मेडिकल उपकरण खरीदी घोटाले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अपनी जांच का दायरा और बढ़ाते हुए कई नए चेहरों को रडार पर ले लिया है। दुर्ग स्थित मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा से रिमांड के दौरान हुई गहन पूछताछ में ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनसे घोटाले की परतें और खुलती जा रही हैं।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान शशांक चोपड़ा ने 6 अन्य कारोबारियों और सहयोगियों के नाम उजागर किए हैं। टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर, कमीशन सिस्टम, फर्जी आपूर्ति, काले धन की चैन और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर अब जांच एजेंसी आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी की तैयारी में जुटी है। शशांक चोपड़ा की 5 दिन की ईडी रिमांड सोमवार को समाप्त हो रही है और आज उसे विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा।
रिमांड के दौरान ईडी ने शशांक चोपड़ा के सामने फर्जी बिल, बैंक ट्रांजैक्शन, सप्लायर कंपनियों का नेटवर्क और कई अहम दस्तावेज रखे। इनसे जुड़े सवालों के जवाब में मिले तथ्यों ने एजेंसी को नए सुराग दिए हैं। माना जा रहा है कि अब ईडी बेनामी लेनदेन और फाइनेंशियल चैनलों की गहराई से जांच करेगी, जिससे घोटाले में शामिल अन्य लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
इस मामले की समानांतर जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) भी कर रहा है। जांच में यह भी आरोप सामने आए हैं कि CGMSC के कुछ अधिकारियों ने शशांक चोपड़ा को संरक्षण दिया। ईडी की फाइल में CGMSC से जुड़े अधिकारी डॉ. अनिल परसाई, दीपक कुमार बांधे, बसंत कुमार कौशिक, कमलकांत पाटनवार और क्षिरोद रौतिया के नाम शामिल हैं, जो फिलहाल रायपुर जेल में बंद हैं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि तत्कालीन IAS और IFS अधिकारियों समेत अन्य अफसरों और आपूर्तिकर्ताओं की मिलीभगत से महज 27 दिनों में करीब 750 करोड़ रुपये की दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीदी की गई। इस जल्दबाजी और कथित घपले से सरकार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, CGMSC घोटाले में शामिल नेटवर्क के और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।