छत्तीसगढ़ में राशन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राजधानी रायपुर में गरीब और मध्यम वर्ग के करीब 40 फीसदी राशन कार्डधारी केवल इसलिए राशन से वंचित हो रहे हैं, क्योंकि उनकी केवाईसी पूरी नहीं हो पा रही। सबसे गंभीर स्थिति बुजुर्गों की है, जिनकी उम्रदराज हथेलियों की रेखाएं घिस जाने से मशीन थंब इंप्रेशन स्वीकार नहीं कर रही। नतीजा यह है कि पात्र होने के बावजूद लोग महीनों से राशन दुकानों, वार्ड कार्यालयों और विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले फेस रीडिंग और थंब इंप्रेशन—दोनों विकल्प उपलब्ध थे, लेकिन अब केवल थंब इंप्रेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। पहले जिन बुजुर्गों के लिए नामिनी का विकल्प दिया गया था, वह सुविधा भी बंद कर दी गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि शहर के कई वार्डों में केवाईसी पूरी न होने के कारण राशन कार्ड ब्लॉक हो गए। कार्डधारी वार्ड पार्षदों से लेकर खाद्य विभाग छत्तीसगढ़ तक शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन राहत धीमी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, रायपुर शहर में एपीएल और बीपीएल श्रेणी के तीन से चार हजार राशन कार्ड पहले ही ब्लॉक हो चुके हैं, जिनमें एपीएल की संख्या अधिक है। जिलेभर में यह आंकड़ा आठ से दस हजार तक पहुंच चुका है। सबसे बड़ी परेशानी सीनियर सिटीजन के साथ है, जिनके थंब इंप्रेशन मशीन नहीं ले रही। वहीं जिन परिवारों में चार से ज्यादा सदस्य हैं, उनमें पांचवें सदस्य की केवाईसी न होने पर पूरा कार्ड ही ब्लॉक कर दिया जा रहा है। कुछ कार्ड इसलिए भी निरस्त हुए, क्योंकि सदस्य मोहल्ला छोड़कर कहीं और चले गए, तो कुछ में मृतकों के नाम अब तक नहीं कटे हैं।
गोवर्धन नगर के हीरालाल जैसे कई परिवारों को तीन महीने से राशन नहीं मिला। राशन दुकान से जवाब मिला कि केवाईसी न होने के कारण कार्ड निरस्त है और अब नया कार्ड बनवाना पड़ेगा, जिसमें आवेदन और इंतजार का लंबा दौर है। इसी तरह रामनगर, कलिंग नगर और भवानी नगर में दर्जनभर से ज्यादा कार्डधारी राशन के लिए भटक रहे हैं। कई ऐसे भी हैं जिन्होंने समय पर केवाईसी करा ली, लेकिन उन्हें बताया गया कि सॉफ्टवेयर में आवंटन अगले महीने से शुरू होगा, इसलिए अभी राशन नहीं मिलेगा।
ब्राह्मणपारा वार्ड में हालात और जटिल हैं। यहां संचालित तीनों सरकारी राशन दुकानों में फेस रीडिंग की सुविधा नहीं है, केवल थंब इंप्रेशन का विकल्प दिया गया है। इससे बड़ी संख्या में कार्डधारियों की केवाईसी अटक गई। वार्ड पार्षद के साथ मिलकर शिकायत के बाद विभाग ने भरोसा दिया है कि फेस केवाईसी के लिए एप जल्द शुरू किया जाएगा, ताकि बुजुर्गों और तकनीकी दिक्कत झेल रहे लोगों को राहत मिल सके।
जिला रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा के अनुसार, जिले में आठ से दस हजार राशन कार्ड केवाईसी न होने के कारण निरस्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि माह की 10 तारीख के बाद केवाईसी कराने पर अगले महीने राशन मिलेगा, क्योंकि आवंटन हर महीने 10 तारीख से पहले किया जाता है। हालांकि, जमीनी सच्चाई यह है कि दो महीने का यह इंतजार गरीब परिवारों के लिए भारी पड़ रहा है। राशन कार्ड होते हुए भी अनाज न मिलना, कई घरों को भूख के मुहाने तक ले जा रहा है और थंब इंप्रेशन की यह बाधा आम जनता की बड़ी चिंता बन चुकी है।