चांदी ने रचा इतिहास: पहली बार ₹3 लाख के पार, एक महीने में ₹1 लाख की छलांग; 2026 में ₹4 लाख तक पहुंचने के संकेत

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कीमती धातुओं के बाजार में चांदी ने ऐसा उछाल दिखाया है, जिसने निवेशकों से लेकर सर्राफा बाजार तक सबको चौंका दिया है। 19 जनवरी को Multi Commodity Exchange (MCX) पर चांदी पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के पार निकल गई। महज एक कारोबारी सत्र में इसमें करीब 14 हजार रुपये की तेजी देखने को मिली, जबकि इससे पहले शुक्रवार को इसका भाव करीब ₹2.87 लाख प्रति किलो था। सर्राफा बाजार में भी चांदी करीब 12 हजार रुपये उछलकर लगभग ₹2.94 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है।

चांदी की कीमतों की यह रफ्तार अपने आप में ऐतिहासिक है। दिसंबर 2025 के आसपास चांदी पहली बार ₹2 लाख प्रति किलो पर पहुंची थी और वहां से ₹3 लाख तक का सफर उसने सिर्फ एक महीने में तय कर लिया। तुलना करें तो ₹1 लाख से ₹2 लाख तक पहुंचने में इसे करीब 9 महीने लगे थे, जबकि ₹50 हजार से ₹1 लाख तक पहुंचने में पूरे 14 साल का वक्त लगा था। यही वजह है कि अब निवेशकों के मन में यह सवाल गहराने लगा है कि आखिर चांदी के दाम इतने तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं और क्या अभी इसमें निवेश करना सही रहेगा।

जानकारों के मुताबिक चांदी की तेजी की सबसे बड़ी वजह इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग है। अब चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और 5G टेक्नोलॉजी में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पूरी दुनिया में ग्रीन एनर्जी पर फोकस बढ़ने से चांदी की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी तरफ सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही। कई देशों में पर्यावरण नियमों के चलते माइनिंग सीमित हो गई है। इसके अलावा करीब 70 फीसदी चांदी तांबा और जिंक जैसी दूसरी धातुओं की खुदाई के दौरान बाय-प्रोडक्ट के रूप में निकलती है, यानी जब तक तांबे की माइनिंग नहीं बढ़ेगी, चांदी की सप्लाई भी नहीं बढ़ सकती। इस डिमांड-सप्लाई गैप ने कीमतों को और ऊपर धकेला है।

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई ने भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा है। शेयर बाजार की अस्थिरता के बीच सोने-चांदी को एक बार फिर सेफ हेवन माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स की कमजोरी ने भी चांदी को सपोर्ट दिया है। हाल के महीनों में डॉलर इंडेक्स 109 के ऊपरी स्तर से फिसलकर करीब 98 तक आ चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों को मजबूती मिली।

निवेश को लेकर बाजार के बड़े नाम भी चांदी को लेकर काफी बुलिश नजर आ रहे हैं। Motilal Oswal Financial Services का मानना है कि 2026 में चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है और हर गिरावट पर खरीदारी की सलाह दी जा रही है। Samco Securities के अनुसार टेक्निकल ब्रेकआउट और मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते चांदी ₹3.94 लाख प्रति किलो तक भी जा सकती है। कमोडिटी एक्सपर्ट नीलेश सुराना का आकलन है कि ग्रीन एनर्जी की मांग और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती से चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति औंस, यानी करीब ₹3.5 से ₹4 लाख प्रति किलो के दायरे में पहुंच सकती है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर भी मानते हैं कि चांदी में लंबी अवधि की तेजी अभी खत्म नहीं हुई है। वहीं ग्लोबल इन्वेस्टर Robert Kiyosaki ने तो यहां तक कहा है कि डॉलर की कमजोरी और महंगाई के चलते 2026 में चांदी $200 प्रति औंस के चौंकाने वाले स्तर को भी छू सकती है।

निवेश के विकल्पों की बात करें तो चांदी में पैसा लगाने के कई रास्ते हैं। फिजिकल सिल्वर यानी सिक्के और बार खरीदना सबसे पारंपरिक तरीका है, हालांकि इसमें शुद्धता और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है। इसके अलावा सिल्वर ETF के जरिए बिना चांदी संभाले भी निवेश किया जा सकता है, जो डिमैट अकाउंट से शेयरों की तरह ट्रेड होते हैं। ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशक MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स के जरिए भी ट्रेडिंग कर सकते हैं, जहां कम पूंजी से बड़ा सौदा किया जा सकता है, लेकिन जोखिम भी उसी अनुपात में ज्यादा होता है।

कुल मिलाकर जिस रफ्तार से चांदी आगे बढ़ रही है, उसने साफ कर दिया है कि यह अब सिर्फ ज्वेलरी मेटल नहीं रही, बल्कि आने वाले सालों में निवेशकों की रणनीति का अहम हिस्सा बनने जा रही है।

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